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शांति भंग के नाम पर मनमानी गिरफ्तारी नहीं… हाईकोर्ट ने जारी किए कड़े दिशा-निर्देश, जानें पूरा मामलाNo arbitrary arrests in the name of breach of peace… High Court issues strict guidelines, know the whole matter

 

प्रयागराज। ने शांति भंग की आशंका के आधार पर की जाने वाली निवारक कार्रवाई और हिरासत के मामलों में महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कानून का उपयोग नागरिकों की स्वतंत्रता का हनन करने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना वैधानिक प्रक्रिया के किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखना संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।


हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निवारक हिरासत के प्रावधानों का प्रयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में और पर्याप्त आधार होने पर ही किया जाना चाहिए। अदालत ने पाया कि कई मामलों में शांति भंग की आशंका का हवाला देकर लोगों को अनावश्यक रूप से हिरासत में रखा जाता है, जो कानून की मंशा के विपरीत है।

अदालत ने निर्देश दिया कि यदि किसी व्यक्ति को अवैध रूप से 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा जाता है, तो राज्य सरकार को पीड़ित को प्रतिदिन 25 हजार रुपये की दर से मुआवजा देना होगा। साथ ही यह राशि संबंधित दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार मजिस्ट्रेटों के वेतन से वसूलने की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

न्यायालय ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि किसी भी निवारक कार्रवाई से पहले पर्याप्त साक्ष्य, स्पष्ट कारण और कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। केवल आशंका या सामान्य शिकायत के आधार पर किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित नहीं किया जा सकता।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला नागरिक अधिकारों की रक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा। इससे निवारक हिरासत के मामलों में मनमानी पर अंकुश लगाने और कानून के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिल सकती है।

अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता भारतीय संविधान की मूल भावना का हिस्सा है और इसकी रक्षा करना राज्य तथा प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अवैध हिरासत या अधिकारों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।

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