लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश टीम के गठन को लेकर दिल्ली में कई दौर की बैठकों के बावजूद अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह दिल्ली से लौटने के बाद भी प्रदेश पदाधिकारियों और क्षेत्रीय अध्यक्षों की सूची जारी नहीं हो सकी है। सूत्रों के अनुसार कई महत्वपूर्ण पदों पर दावेदारी, क्षेत्रीय संतुलन और जातीय समीकरणों को लेकर शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर मंथन जारी है।
भाजपा 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन में बड़ा बदलाव करना चाहती है। इसी कारण नई टीम में पुराने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है। कई दिग्गज नेता अपने समर्थकों को महत्वपूर्ण पद दिलाने के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिससे सूची को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है।
दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महामंत्री बीएल संतोष और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के साथ लगातार बैठकें हुई हैं। बताया जा रहा है कि संभावित पदाधिकारियों की सूची पर कई स्तरों पर चर्चा हुई, लेकिन कुछ नामों पर अभी भी सहमति नहीं बन सकी है।
सूत्रों का कहना है कि संगठन में इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पिछड़ा वर्ग, दलित, महिला और युवा नेतृत्व को पर्याप्त स्थान देने की रणनीति पर काम चल रहा है। भाजपा नेतृत्व महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के फार्मूले पर भी विचार कर रहा है।
इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी संगठन की नई टीम को लेकर चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की सहमति और केंद्रीय नेतृत्व की अंतिम मंजूरी के बाद ही नई टीम का ऐलान होगा।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा संगठन की यह सूची केवल पदों का बंटवारा नहीं बल्कि 2027 के चुनावी युद्ध की रणनीतिक टीम होगी। यही कारण है कि दिल्ली दरबार में हर नाम पर गहन मंथन हो रहा है और अंतिम सूची जारी होने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।

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