हर साल 6 हजार कॉर्निया की जरूरत, उपलब्ध हो पाते हैं केवल 1,500; जागरूकता की कमी बनी बड़ी चुनौती
मध्य प्रदेश में कॉर्निया प्रत्यारोपण (कॉर्नियल ट्रांसप्लांट) की जरूरत वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके मुकाबले कॉर्निया दान की उपलब्धता बेहद कम है। स्थिति यह है कि प्रदेश में हर वर्ष लगभग 6 हजार कॉर्निया की आवश्यकता होती है, जबकि सालाना केवल करीब 1,500 कॉर्निया ही उपलब्ध हो पाते हैं। इसके कारण हजारों मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदेश में करीब दो लाख लोग ऐसे हैं जो कॉर्निया संबंधी समस्याओं के कारण दृष्टिबाधित हैं और उन्हें आंखों की रोशनी वापस पाने के लिए कॉर्निया प्रत्यारोपण की जरूरत है। उपलब्धता और मांग के बीच बड़े अंतर के कारण लगभग 75 प्रतिशत मरीजों को वर्षों तक प्रतीक्षा सूची में रहना पड़ता है।
नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कॉर्निया दान के प्रति जागरूकता की कमी इस समस्या का प्रमुख कारण है। अधिकांश लोग मृत्यु के बाद नेत्रदान की प्रक्रिया और उसके महत्व से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। जबकि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगों को नई रोशनी मिल सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज में नेत्रदान को लेकर जागरूकता बढ़े और अधिक लोग इसके लिए संकल्प लें, तो हजारों लोगों की जिंदगी में उजाला लाया जा सकता है। इसके लिए सरकारी संस्थानों, सामाजिक संगठनों और चिकित्सा संस्थाओं को मिलकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे नेत्रदान के लिए आगे आएं और अपने परिजनों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उनका कहना है कि मृत्यु के बाद किया गया नेत्रदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को फिर से दुनिया देखने का अवसर दे सकता है, जो मानवता की सबसे बड़ी सेवाओं में से एक है।

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