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MP में कांग्रेस की बैठक से 4 विधायक गायब, बीजेपी ने की तगड़ी घेराबंदीFour MLAs missing from Congress meeting in MP, BJP tightens its grip

 

मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक बदलावों के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के समर्थन और संगठनात्मक एकजुटता दिखाने के लिए बुलाई गई बैठक में चार विधायकों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई। इसे लेकर सत्तारूढ़ भाजपा ने कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला है।


बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री शुरुआत में मौजूद नहीं रहे। हालांकि बाद में वे ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े और संगठन के प्रति अपना समर्थन जताया। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि पार्टी के 62 विधायक नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी तरह की टूट या असंतोष की खबरें निराधार हैं।

दूसरी ओर भाजपा ने बैठक से कुछ विधायकों की अनुपस्थिति को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस में गुटबाजी और नेतृत्व संकट का आरोप लगाया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि सब कुछ सामान्य है तो महत्वपूर्ण बैठक में विधायकों की गैरमौजूदगी कई सवाल खड़े करती है।

कांग्रेस ने दिया एकजुटता का संदेश

कांग्रेस का कहना है कि कुछ विधायक व्यक्तिगत या पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके। पार्टी ने स्पष्ट किया कि अनुपस्थिति को असंतोष से जोड़ना राजनीतिक प्रचार का हिस्सा है। नेताओं ने दावा किया कि प्रदेश संगठन और विधायक दल पूरी तरह एकजुट है।

भाजपा को मिला हमला करने का मौका

बैठक से चार विधायकों की गैरहाजिरी चर्चा का विषय बनी।

कमलनाथ शुरुआत में नहीं पहुंचे, बाद में वर्चुअली जुड़े।

कांग्रेस ने 62 विधायकों के समर्थन का दावा किया।

भाजपा ने कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान का आरोप लगाया।

प्रदेश की राजनीति में नेतृत्व और संगठन को लेकर नई बहस शुरू।

राजनीतिक मायने

मध्य प्रदेश कांग्रेस लंबे समय से संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी है। ऐसे में किसी भी बड़े नेता या विधायक की अनुपस्थिति राजनीतिक संदेश के रूप में देखी जाती है। हालांकि कांग्रेस इसे सामान्य घटना बता रही है, लेकिन भाजपा इसे विपक्ष की कमजोरी के तौर पर पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही।

फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व एकजुटता का संदेश देने में जुटा है, जबकि भाजपा इस मुद्दे को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या प्रदेश की राजनीति में कोई बड़ा असर छोड़ता है।

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