नई दिल्ली। सुबह नींद खुलते ही मोबाइल फोन उठाकर सोशल मीडिया, मैसेज, ईमेल या समाचार देखने की आदत आज लाखों लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है और दिन की शुरुआत तनाव, चिंता तथा मानसिक थकान के साथ करा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जागने के तुरंत बाद मस्तिष्क धीरे-धीरे सक्रिय अवस्था में आता है। ऐसे समय यदि व्यक्ति अचानक मोबाइल पर ईमेल, काम से जुड़े संदेश, नकारात्मक खबरें या सोशल मीडिया की सूचनाएं देखता है तो मस्तिष्क पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। इससे शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है और दिनभर बेचैनी महसूस हो सकती है।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि सुबह के पहले कुछ मिनट मानसिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि दिन की शुरुआत मोबाइल नोटिफिकेशन से होती है, तो व्यक्ति का ध्यान अपने विचारों और दिन की योजना के बजाय बाहरी सूचनाओं पर केंद्रित हो जाता है। इससे एकाग्रता प्रभावित हो सकती है और मानसिक थकान जल्दी महसूस हो सकती है।
मोबाइल की जगह क्या करें?
जागने के बाद कुछ मिनट गहरी सांस लें।
एक गिलास पानी पिएं।
हल्का व्यायाम या स्ट्रेचिंग करें।
ध्यान या प्रार्थना के लिए समय निकालें।
दिन की प्राथमिकताओं की योजना बनाएं।
कम से कम 20–30 मिनट तक मोबाइल से दूरी रखें।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि सुबह-सुबह सोशल मीडिया पर दूसरों की उपलब्धियां या जीवनशैली देखने से अनजाने में तुलना की भावना बढ़ सकती है, जिससे आत्मविश्वास और मनोदशा पर असर पड़ सकता है।
हालांकि मोबाइल स्वयं समस्या नहीं है, लेकिन उसका उपयोग कैसे और कब किया जाता है, यह महत्वपूर्ण है। यदि सुबह की शुरुआत शांत वातावरण, सकारात्मक सोच और व्यवस्थित दिनचर्या के साथ की जाए तो मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रह सकता है और पूरे दिन ऊर्जा तथा उत्पादकता बनी रह सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि सुबह उठते ही मोबाइल देखने की आदत को धीरे-धीरे कम किया जाए और दिन के शुरुआती समय को स्वयं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए समर्पित किया जाए।

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