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इजराइल-लेबनान में फिर सीजफायर पर सहमति, दक्षिणी लेबनान में बनेंगे सुरक्षा क्षेत्रIsrael and Lebanon agree on a ceasefire, creating a security zone in southern Lebanon

 

हिज्बुल्लाह को हटाने की योजना, लेबनानी सेना संभालेगी नियंत्रण

बेरूत | बौद्धिक प्रतिकार

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच इजराइल और लेबनान ने अमेरिका की मध्यस्थता में एक बार फिर युद्धविराम (सीजफायर) लागू करने पर सहमति जताई है। समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान में विशेष सुरक्षा क्षेत्र (सिक्योरिटी जोन) बनाए जाएंगे, जहां हिज्बुल्लाह की सैन्य मौजूदगी नहीं रहेगी।


समझौते के अनुसार इन क्षेत्रों की सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण की जिम्मेदारी लेबनानी सेना को सौंपी जाएगी। इसका उद्देश्य सीमा क्षेत्र में तनाव कम करना और दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की संभावना को घटाना बताया जा रहा है।

हिज्बुल्लाह की भूमिका पर फोकस

इजराइल लंबे समय से दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह की गतिविधियों को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताता रहा है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे इलाकों को हिज्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियों से मुक्त रखने का प्रयास किया जाएगा।

हालांकि राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन पर इस समझौते को लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि क्षेत्र में वर्षों से हिज्बुल्लाह का प्रभाव बना हुआ है।

सीजफायर के बावजूद तनाव बरकरार

युद्धविराम पर सहमति के बावजूद दोनों पक्षों के बीच अविश्वास पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हाल के दिनों में इजराइली सैन्य कार्रवाइयों और हिज्बुल्लाह से जुड़े घटनाक्रमों के कारण क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों पक्ष समझौते की शर्तों का पालन करते हैं तो यह मध्य पूर्व में स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। लेकिन किसी भी उल्लंघन की स्थिति में हालात फिर से बिगड़ सकते हैं।

अमेरिका की अहम भूमिका

इस समझौते में अमेरिका ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। वॉशिंगटन का मानना है कि सीमा क्षेत्र में स्थिरता आने से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका कम होगी और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह नया सीजफायर वास्तव में शांति का रास्ता खोलेगा या फिर यह भी पिछले समझौतों की तरह सीमित अवधि तक ही टिक पाएगा।

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