बोले- रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंचा भारत, भविष्य में जनसंख्या घटने और बुजुर्ग आबादी बढ़ने का खतरा
दुनिया के चर्चित उद्योगपति ने भारत की घटती जन्म दर को लेकर चिंता जताई है। मस्क ने कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) अब ‘रिप्लेसमेंट लेवल’ 2.1 से नीचे पहुंच चुकी है, जो लंबे समय में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है।
मस्क की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत की कुल प्रजनन दर घटकर करीब 1.9 जन्म प्रति महिला रह गई है। जनसांख्यिकी विशेषज्ञों के अनुसार 2.1 का स्तर वह न्यूनतम दर माना जाता है, जिस पर एक पीढ़ी खुद को संख्या के लिहाज से प्रतिस्थापित कर सकती है। इससे नीचे जाने पर भविष्य में जनसंख्या स्थिर होने या घटने की आशंका बढ़ जाती है।
दिल्ली की स्थिति और भी चौंकाने वाली बताई जा रही है। आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी की फर्टिलिटी रेट कई विकसित देशों के स्तर तक पहुंच गई है और कुछ अनुमानों में यह जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं से भी कम दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे शहरीकरण, बढ़ती शिक्षा, करियर प्राथमिकताओं, देर से विवाह और जीवन-यापन की बढ़ती लागत से जोड़कर देख रहे हैं।
जनसांख्यिकी विशेषज्ञों का कहना है कि कम जन्म दर का प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन आने वाले दशकों में इसका असर श्रमशक्ति, आर्थिक विकास, सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और बुजुर्ग आबादी के अनुपात पर पड़ सकता है। यही कारण है कि दुनिया के कई विकसित देश आज घटती जन्म दर और वृद्ध होती आबादी की चुनौती से जूझ रहे हैं।
एलन मस्क पहले भी कई बार वैश्विक स्तर पर गिरती जन्म दर को मानव सभ्यता के सामने बड़ी चुनौतियों में से एक बता चुके हैं। उनका तर्क है कि यदि अधिकांश देशों में प्रजनन दर लगातार रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे बनी रहती है, तो भविष्य में कई समाजों को जनसंख्या संकुचन और कार्यबल की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि भारत अब भी दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि देश की जनसंख्या संरचना तेजी से बदल रही है। ऐसे में आने वाले वर्षों में जनसंख्या वृद्धि के बजाय जनसंख्या की गुणवत्ता, कौशल विकास, रोजगार और बुजुर्गों की देखभाल जैसे मुद्दे नीति निर्माण के केंद्र में आ सकते हैं।

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