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छत्तीसगढ़ में ब्लैकलिस्टेड कंपनी से दवा खरीद का मामला, करोड़ों की सप्लाई पर उठे सवालChhattisgarh: Drug procurement from a blacklisted company raises questions about supplies worth crores

 


रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं की खरीद को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि जिन कंपनियों पर अन्य राज्यों में प्रतिबंध या ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई हो चुकी है, उनमें से एक कंपनी से राज्य में करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद की गई। इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल सप्लाई व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।


जानकारी के अनुसार, संबंधित दवा कंपनी को मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत कुछ अन्य राज्यों में गुणवत्ता और आपूर्ति संबंधी शिकायतों के चलते ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पतालों के लिए उसी कंपनी से लगातार दवाओं की खरीद किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि हर महीने करोड़ों रुपये मूल्य की दवाओं की आपूर्ति इस कंपनी के माध्यम से की जा रही थी। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया है कि जब कंपनी के खिलाफ पहले से कार्रवाई दर्ज थी तो उसे सप्लाई के लिए अनुमति कैसे दी गई।

मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक दवा खरीदी प्रक्रिया, टेंडर आवंटन और गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता से सीधे मरीजों का स्वास्थ्य जुड़ा होता है। ऐसे में खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है।

फिलहाल मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है, जबकि संबंधित विभाग का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत की गई हैं और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला अब छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी खरीद प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।

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