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क्या स्टेंट डलवाने के बाद भी आ सकता है हार्ट अटैक? एक्सपर्ट ने बताई सच्चाईCan a stent still cause a heart attack? Experts reveal the truth.

स्टेंट इलाज है, पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं; जीवनशैली और दवाओं में लापरवाही बढ़ा सकती है खतरा



नई दिल्ली। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, दिल की धमनियों में ब्लॉकेज होने पर लगाए जाने वाले स्टेंट से रक्त प्रवाह बेहतर होता है और हार्ट अटैक का खतरा कम किया जा सकता है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि भविष्य में कभी हार्ट अटैक नहीं आएगा। यदि मरीज दवाएं नियमित न ले, जीवनशैली में सुधार न करे या नई धमनियों में रुकावट विकसित हो जाए, तो जोखिम बना रह सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में अचानक रुकावट आ जाती है। स्टेंट केवल उस विशेष ब्लॉकेज को खोलता है जहां उसे लगाया गया है। समय के साथ अन्य धमनियों में भी वसा और कोलेस्ट्रॉल जमा हो सकते हैं, जिससे दोबारा हृदय संबंधी समस्या पैदा हो सकती है।

स्टेंट डलवाने के बाद किन बातों का रखें ध्यान?

डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लें।


ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें।


धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।


नियमित व्यायाम और संतुलित आहार अपनाएं।


वजन नियंत्रित रखें और तनाव कम करने का प्रयास करें।


समय-समय पर हृदय की जांच करवाते रहें।

हार्ट अटैक के प्रमुख लक्षण

हार्ट अटैक के दौरान सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना, जबड़े, कंधे या बाएं हाथ में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे संकेत मिलने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है।


कार्डियोलॉजिस्टों का कहना है कि स्टेंट के बाद मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि स्टेंट कोई स्थायी "क्योर" नहीं, बल्कि हृदय रोग के प्रबंधन का एक हिस्सा है। नियमित निगरानी, स्वस्थ जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह का पालन ही लंबे समय तक हृदय को स्वस्थ रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।


नोट: किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए अपने चिकित्सक या हृदय रोग विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें।

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