भारत में महिलाओं की शिक्षा, वित्तीय भागीदारी और डिजिटल पहुंच में सुधार देखने को मिला है, लेकिन स्वास्थ्य और डिजिटल असमानता को लेकर अब भी गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़ों में महिलाओं की स्थिति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण तस्वीरें सामने आई हैं।
शहरी महिलाओं में मोटापे की बढ़ती समस्या
सर्वे के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं में मोटापे की समस्या ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक पाई गई है। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की आदतों को इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल खाई बरकरार
डिजिटल इंडिया अभियान के बावजूद ग्रामीण भारत की करीब 42 प्रतिशत महिलाएं अभी भी इंटरनेट का उपयोग नहीं कर पा रही हैं। यह आंकड़ा बताता है कि डिजिटल पहुंच और तकनीकी सशक्तिकरण के क्षेत्र में अभी काफी काम किया जाना बाकी है।
बैंकिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को लेकर सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। सर्वे के मुताबिक, बैंक या बचत खाते का स्वयं संचालन करने वाली महिलाओं की संख्या 78.6 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई है। यह महिलाओं की वित्तीय साक्षरता और आत्मनिर्भरता में बढ़ोतरी का संकेत माना जा रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी सुधार
15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में 50.4 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने 10 वर्ष या उससे अधिक समय तक स्कूली शिक्षा प्राप्त की है। यह आंकड़ा महिला शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति को दर्शाता है।
क्या कहते हैं ये आंकड़े?
सर्वे से साफ है कि भारत में महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है। हालांकि स्वास्थ्य, मोटापा और डिजिटल पहुंच जैसे क्षेत्रों में अभी भी चुनौतियां मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल साक्षरता पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी होगा।
NFHS के ये आंकड़े बताते हैं कि भारत की महिलाएं कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन समान अवसर और बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

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