बौद्धिक प्रतिकार ।
सिवनी। Pench Tiger Reserve में बाघों को खतरनाक संक्रमण से बचाने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। वन विभाग और पशुपालन विभाग की संयुक्त पहल के तहत रिजर्व के आसपास के गांवों में लगभग 1500 पालतू और आवारा कुत्तों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह अभियान कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के खतरे को देखते हुए शुरू किया गया है। यह वायरस सामान्यतः कुत्तों में पाया जाता है, लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इसके संक्रमण से बाघ और अन्य बड़े मांसाहारी वन्यजीव भी प्रभावित हो सकते हैं। हाल ही में Kanha Tiger Reserve में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत के बाद इस खतरे को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है।
वन अधिकारियों के अनुसार रिजर्व क्षेत्र के आसपास रहने वाले कुत्तों का टीकाकरण कर एक सुरक्षा घेरा तैयार किया जा रहा है, ताकि संक्रमण जंगल तक न पहुंचे। इसके लिए गांववार सूची तैयार की गई है और पशु चिकित्सकों की टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस जंगली जीवों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकता है, जिससे संक्रमण घातक रूप ले सकता है। इसी वजह से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने देशभर के टाइगर रिजर्वों को कुत्तों के टीकाकरण और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि पालतू पशुओं का समय पर टीकाकरण और आवारा कुत्तों की निगरानी बाघ संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अभियान के तहत नियमित स्वास्थ्य जांच, निगरानी और जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार आज बाघ संरक्षण केवल जंगलों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जंगल से लगे गांवों और वहां रहने वाले पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन से भी सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे में यह टीकाकरण अभियान बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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