रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब और डीएमएफ (जिला खनिज न्यास) घोटालों में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मुख्य सूत्रधार और रिटायर्ड आईएएस से जुड़े नेटवर्क की अब तक 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क कर दी हैं। जांच में दावा किया गया है कि संगठित सिंडिकेट ने विभिन्न घोटालों के जरिए करीब 4,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य जांच एजेंसियों के अनुसार शराब घोटाला, डीएमएफ फंड अनियमितता, कोयला परिवहन और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में कई कंपनियों, अचल संपत्तियों, बैंक खातों और निवेशों को जब्त किया गया है। एजेंसियों का आरोप है कि इन घोटालों से अर्जित रकम को विभिन्न माध्यमों से निवेश कर संपत्तियां खड़ी की गईं।
जांच अधिकारियों का दावा है कि सिंडिकेट ने सरकारी तंत्र और कारोबारी नेटवर्क का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ अर्जित किया। जांच के दौरान कई दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और कथित बेनामी निवेशों का भी पता चला है, जिनके आधार पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि कथित घोटालों से प्राप्त धनराशि को रियल एस्टेट, होटल, व्यावसायिक परिसरों और अन्य कारोबारों में लगाया गया। इसी आधार पर विभिन्न राज्यों में स्थित संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई की गई है।
हालांकि आरोपित पक्षों ने कई मामलों में अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है और अदालतों में कानूनी लड़ाई जारी है। मामले की सुनवाई विभिन्न न्यायिक मंचों पर चल रही है और अंतिम दोषसिद्धि अभी होना बाकी है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला काफी चर्चित रहा है। विपक्ष लगातार इसे छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक बता रहा है, जबकि जांच एजेंसियां इसे संगठित भ्रष्टाचार का मामला मानकर आगे बढ़ रही हैं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की पड़ताल अभी जारी है तथा आने वाले समय में और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है। यदि जांच में सामने आए दावों की पुष्टि होती है तो यह देश के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में शामिल मामलों में गिना जा सकता है।

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