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सागर जिले में लाश जलाने को नहीं मिल रही लकड़ी, अपनों को मुखाग्नि देने भटक रहे हैं लोगWood is not available for cremation in Sagar district, people are wandering around to perform the last rites of their loved ones.

 



 इंसान की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार गरिमा के साथ करना समाज और प्रशासन की एक बुनियादी जिम्मेदारी होती है, लेकिन देवरी कला में सिस्टम की लापरवाही ने इस आखिरी सफर को भी मुश्किल बना दिया है. वर्तमान में देवरी नगर के लोग एक अजीबोगरीब और बेहद गंभीर संकट से जूझ रहे हैं, जहां अपनों के अंतिम संस्कार के लिए उन्हें सरकारी जलाऊ लकड़ी नसीब नहीं हो रही है. ऐसे में लोग अपनों को मुखाग्नि देने के लिए भटक रहे हैं. वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ध्यान न देने के कारण पिछले तीन महीनों से दक्षिण वनमंडल के वन परिक्षेत्र देवरी मुख्यालय में जलाऊ लकड़ी की उपलब्धता शून्य बनी हुई है. यह समस्या केवल प्रशासनिक सुस्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर आम जनता, खासकर गरीब परिवारों की जेब पर पड़ रहा है.

जब किसी परिवार में किसी की मृत्यु होती है, तो दुखी परिजन वन परिक्षेत्र कार्यालय का रुख करते हैं, लेकिन वहां उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है. मजबूरी में लोगों को निजी चिरान मशीनों से बहुत ऊंचे दामों पर लकड़ी खरीदनी पड़ रही है. जहां सरकारी डिपो से लकड़ी सस्ती मिलती थी, वहीं अब भारी रकम खर्च करना लोगों की मजबूरी बन गया है. सुखचैन वार्ड के निवासी अजय ठाकुर ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि उनके पड़ोस में एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर जब वह लकड़ी लेने वन परिक्षेत्र कार्यालय पहुंचे, तो वहां उन्हें साफ मना कर दिया गया. उन्हें बताया गया कि पिछले तीन महीनों से यहाँ जलाऊ लकड़ी उपलब्ध नहीं है. अजय ठाकुर ने बताया कि उन्हें चिरान मशीन से बहुत मुश्किल से और काफी महंगी कीमत पर लकड़ी का इंतजाम करना पड़ा. यह स्थिति केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे नगर की बन चुकी है.


हैरानी की बात यह है कि वन विभाग कार्यालय परिसर में लकड़ियों के बड़े-बड़े ढेर रखे हुए हैं, लेकिन ये आम जनता के किसी काम नहीं आ रहे. अधिकारियों का कहना है कि यह लकड़ी फोरलेन बनाने के दौरान काटी गई थी और सुरक्षा के लिहाज से यहां रखी गई है. वन विभाग का तर्क है कि जब तक इन लकड़ियों की नीलामी नहीं हो जाती, वे इसे जनता को अंतिम संस्कार के लिए नहीं दे सकते. सरकारी नियमों की इस पेचीदगी ने इंसानियत को पीछे छोड़ दिया है, जहां लकड़ियां परिसर में रखी-रखी खराब हो रही हैं, लेकिन लोगों को चिता जलाने के लिए नहीं दी जा सकतीं. इस मामले में जब प्रभारी वन परिक्षेत्र अधिकारी जयप्रकाश (प्रशिक्षु आईएफएस) से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि जलाऊ लकड़ी की समस्या पिछले कुछ दिनों से बनी हुई है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह के भीतर जलाऊ लकड़ी की व्यवस्था करा ली जाएगी.

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