• रवि उपाध्याय
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के बहुमत खोने और खुद अपने गृह क्षेत्र भवानीपुर से चुनाव हार जाने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने त्रिया हठ अपनाते हुए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया है। उनका आरोप है कि वह हारीं नहीं है उन्हें निर्वाचन आयोग ने साजिशन हराया है। ममता के इस अवांक्षित कदम से एक पश्चिम बंगाल में नया संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है।
निर्वाचन की अधिसूचना जारी : इसी बीच भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में 18 वीं विधानसभा निर्वाचन की विधिवत अधिसूचना जारी कर दी है। बता दें कि पिछली 17 वीं विधानसभा का कार्यकाल भी कल यानि गुरुवार 07 मई को समाप्त हो रहा है।
देश और दुनिया में यह एक सामान्य राजनैतिक परंपरा रही है कि चुनावों परिणाम में बहुमत खोने के बाद संवैधानिक पदों पर मौजूद मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री स्वयंमेव अपना पद छोड़ देते हैं। इसका एक दिन पहले का ताजा उदाहरण तमिलनाडु में देखा जा सकता है, जहां डीएमके को चुनावों में बहुमत न मिलने और मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने चुनाव हार जाने के बाद, खुद अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। इसके बाद 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में 108 सीटें जीतने वाले टीवीके के सी विजयन ने गवर्नर के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया।
यहां यह बता दें कि पश्चिम बंगाल की 17 वीं विधानसभा का कार्यकाल 07 मई 26 को समाप्त होने जा रहा है। इसी दिन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भाजपा विधायक दल की बैठक भी होने वाली है। जिसमे संभवतः नए नेता का चुनाव किया जाएगा। उसके बाद बैठक में विधायक दल का नव निर्वाचित नेता राज्यपाल से मिल कर अपने दल के निर्वाचित विधायकों की सूची दे कर, सरकार के गठन का दावा पेश करेंगे। इसी के साथ ही वे सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए राज्यपाल से समय और तिथि देने का भी आग्रह कर सकते हैं।
दुनिया में जिन भी देशों में लोकतंत्र हैं वहां एक दल से दूसरे दल और एक सरकार से दूसरे सरकार के बीच सत्ता का हस्तांतरण,सदभावना और सौजन्यता पूर्वक होता आया है। देश के संवैधानिक इतिहास में ऐसी स्थिति कभी पैदा नहीं हुई जैसी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पैदा करने की कोशिश कर के, संविधान और परंपराओं को धता बताने का प्रयास कर रहीं हैं। उनकी यह ज़िद नैतिक और संवैधानिक दृष्टि से पूर्णतः गैर कानूनी, असंवैधानिक और अमान्य है। उनका यह कदम बगावत की श्रेणी में आता है। माना कि वे जन्मजात विद्रोहिणी है पर हर चीज की एक मर्यादा होती हैं। वे अरविन्द केजरीवाल की तरह अराजकता पूर्ण एवं अमर्यादित व्यवहार कर रहीं हैं।
ममता बनर्जी को सोचना चाहिए कि 2011जब वे पहली बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं थीं, तब क्या राज्य में 34 साल से सत्ता में काबिज़ वामपंथी सरकार के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने उनके साथ भी ऐसा ही सलूक किया था जैसा वह अब कर रहीं है ? यदि नहीं तो फिर उनका त्रिया हठ और राज हठ कितना उचित है। उनको अपनी और अपनी पार्टी की हार को सामान्य रूप से स्वीकार करना चाहिए न की बगावत करना चाहिए। यदि उनको लगता है कि उनके साथ अन्याय हुआ है तो उन्हें कोर्ट जाना चाहिए।
ट्रंप भी कर चुके हैं ऐसा अमर्यादित व्यवहार
अमेरिका को दुनिया का सबसे पुराना लोकतांत्रिक देश कहा जाता है। वहां भी इस तरह की घटना 2020 को छोड़ कर अमेरिका के 250साल पुराने लोकतंत्र के इतिहास में कभी नहीं घटित हुई । वहां की लोकतांत्रिक परंपरा को कलंकित सन् 2020 में अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में अपने प्रथम कार्यकाल में तब किया था जब वे दूसरी बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हार गए थे। तब उन्होंने भी अपने पद से इस्तीफा देने से इंकार कर दिया था। ममता बनर्जी की तरह उनका भी यही आरोप था कि वे चुनाव हारे नहीं है बल्कि उनको हराया गया है। यह एक सच्चाई भी है कि कोई भी व्यक्ति खुद से चुनाव नहीं हारता है उसे दूसरा व्यक्ति या पक्ष ही हराता है। सत्ता न तो किसी व्यक्ति की गुलाम होती है और न ही सत्ता किसी की बपौती ही होती है। लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले व्यक्ति को इस तरफ की गलत फहमी हो जाती है। एक ही व्यक्ति या एक ही वंश का सत्ता में बना रहना राजतंत्र में तो एक बार संभव भी है। पर लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव ही तो लोकतंत्र की मूल भावना में सन्नहित है। राजतंत्र में भी कोई भी राज्य या राजा चिरकाल तक सत्ता में नहीं रहता। उससे शक्तिशाली दूसरा राजा उसे सत्ता से हटा कर उसके राज्य पर कब्जा कर लेता है।
इस्तीफा देना सामान्य परंपरा
हमारे देश में यह परंपरा है कि चुनाव किसी भी राज्य में नए चुनावों के नतीजे आने के बाद मौजूदा मुख्यमंत्री राज्यपाल को अपना और अपने मंत्री मंडल का इस्तीफा सौंपता है। चाहे इस्तीफा देने वाले मुख्यमंत्री और उसकी पार्टी या गठबंधन को नए चुनावों में बहुमत मिला हो या नहीं। मौजूदा मुख्यमंत्री के इस्तीफा देने के बाद राज्यपाल निवर्तमान मुख्यमंत्री से अगली सरकार के गठन होने तक काम चलाऊ मुख्यमंत्री (केयर टेकर ) बने रहने का आग्रह करता है। इसी के बाद नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जाता है। ऐसे समय में पूर्व मंत्री मंडल स्वत: समाप्त हो जाता है।
क्या बर्खास्त होंगी ममता : यदि ममता बनर्जी एक स्वस्थ संवैधानिक परंपराओं के अनुसार यदि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देतींं हैं तो राज्यपाल उन्हें बर्खास्त कर सकता है और नव निर्वाचित बहुमत प्राप्त दल के निर्वाचित नेता को नए मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी इस पूरे मसले पर कहते हैं कि ममता बनर्जी को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री का पद छोड़ना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करतीं हैं तब राज्यपाल को उन्हें बलपूर्वक हटा देना चाहिए। संविधान निर्माताओं ने संविधान रचते समय जरा भी कल्पना नहीं की संवैधानिक पद पर बैठा कोई व्यक्ति इस तरह फेविकोल लगा कर कुर्सी छोड़ने से इनकार कर इस तरह का असंयमित व्यवहार करेगा।
यहां यह बता दें कि किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री, राज्यपाल या गवर्नर के प्रसाद तक अपने पद पर बने रह सकता है। मुख्यमंत्री को नियुक्त करने, उसका त्यागपत्र लेने या उसे पदच्युत करने का अधिकार गवर्नर को होता है। यदि मुख्यमंत्री अवैध तरह से कार्य करता है तो वह उसे पद से हटा सकता है। इसके साथ यदि किसी राज्य में यदि संवैधानिक संकट उत्पन्न होता है तो राज्यपाल की सिफारिश पर उक्त राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा कर विधानसभा स्थगित कर सकता है।
विधानसभा का समापन जरूरी : यहां बता दें कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की 17 वीं निर्वाचित विधानसभा की नेता थीं। उक्त विधानसभा का कार्यकाल 07 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा। लेकिन 17 वीं विधानसभा के समापन की घोषणा होना बाकी है। वैसे इसके समापन की घोषणा विधानसभा स्पीकर द्वारा किए जाने की परंपरा है। जबकि इस समय स्पीकर तृणमूल कांग्रेस पार्टी का है। यदि वह निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य की 18 वीं विधानसभा के निर्वाचन की अधिसूचना जारी होने के बाद भी पुरानी यानि 17 वीं विधानसभा के समापन की घोषणा नहीं करता है तो राज्यपाल ऐसी अधिसूचना जारी कर सकते हैं। क्योंकि विधानसभा सत्र आहूत करने के लिए राज्यपाल ही स्वीकृति देते हैं। उसी के बाद अधिसूचना जारी की जा सकती हैं। राज्यपाल मौजूदा स्पीकर से 17 वीं विधानसभा के समापन के लिए अधिसूचना जारी करने को कह सकते हैं।
क्या कहता है संविधान
अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं. बाकी मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करते हैं. यह अनुच्छेद स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री राज्यपाल के चाहने तक ही अपने पद पर बने रहते हैं.
मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति जवाबदेह होती है. यदि कोई मुख्यमंत्री चुनाव हार जाता है या उनकी पार्टी बहुमत खो देती है, तो उनके पास सत्ता में बने रहने का नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं रह जाता.
सीएम का कार्यकाल भी तय
अनुच्छेद 172 कहता है कि राज्य विधानसभा का कार्यकाल अधिकतम 5 वर्ष होता है, इसी के आधार पर मुख्यमंत्री का कार्यकाल भी निर्धारित होता है. अनुच्छेद 164 कहता है कि मुख्यमंत्री "राज्यपाल के प्रसादपर्यंत" यानि उनके चाहने तक पद पर बने रहते हैं, लेकिन ये संविधान के अनुसार होता है यानी बहुमत खोने पर पद पर बने रहने का अधिकार खुद ही खत्म हो जाता है.
संवैधानिक रूप से, बहुमत नहीं होने पर सरकार नहीं चल सकती. ऐसे में ममता इस्तीफा दें या नहीं दें उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. सत्ता परिवर्तन संवैधानिक तौर पर तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगा.
राज्य में कानून व्यवस्था
ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इंकार के बाद उनकी पार्टी के समर्थक पश्चिम बंगाल में उपद्रव और कानून व्यवस्था को भंग करने का
और हिंसा फैलाने का प्रयास करते हैं तो उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जा सकती हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को हुए उपद्रव और आगजनी की घटना के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महा निदेशक और केंद्रीय सुरक्षा दलों से कहा है राज्य में हर हालात में कानून व्यवस्था बनाई रखी जाए। संभावना है कि कहीं कहीं राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी आमने सामने आ सकते हैं। राज्य में निर्वाचन आयोग विजय जुलूस निकालने पर पहले से ही रोक लगा चुका।
यह देखना दिलचस्प होगा कि ममता बनर्जी अपने राजहठ पर कब तक कायम रहतीं हैं। यह सही है कि वे लड़ाकू महिला नेत्री हैं लेकिन लड़ाकू होने और बागी होने में बहुत अंतर। इस्तीफा देने
से इंकार करने से उनकी छबि एक सत्ता पिपासु नेता की बनेगी। विपक्षी दलों को भी भाजपा की डाह में उन्हें चने के झाड़ पर चढ़ाना और आग में घी डालने का काम बंद करना चाहिए।
( लेखक राजनैतिक समीक्षक और एक सशक्त व्यंग्यकार भी हैं। )
06052026
Post a Comment