मध्य प्रदेश में मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान नर्मदा नदी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। कई स्थानों पर यह दावा किया जा रहा है कि नर्मदा मैया में शौचालय और नालों का गंदा पानी मिल रहा है, जिससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है और श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंच रही है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि घाटों के आसपास सीवेज व्यवस्था बेहद खराब है। कई जगहों पर बिना ट्रीटमेंट का गंदा पानी सीधे नर्मदा में छोड़ा जा रहा है। यह स्थिति न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से चिंताजनक है, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है।
इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं। अब कलेक्टर और संबंधित विभागों के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है। कुछ स्थानीय संगठनों ने इस लापरवाही को लेकर अधिकारियों के इस्तीफे तक की मांग कर डाली है।
राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा गरमाने लगा है। विपक्ष ने सीधे तौर पर मोहन सरकार को घेरते हुए इसे प्रशासनिक विफलता बताया है, वहीं सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह इस मामले में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर अपनी जवाबदेही साबित करे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सीवेज ट्रीटमेंट और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त नहीं किया गया, तो नर्मदा जैसी जीवनदायिनी नदी का पारिस्थितिक संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

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