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ईरान-UAE की मौजूदगी में भारत का बड़ा कूटनीतिक संदेश, जयशंकर बोले- “स्थिरता चुनिंदा नहीं हो सकती”India's major diplomatic message in the presence of Iran and UAE, Jaishankar said - "Stability cannot be selective"

 


नई दिल्ली ।बौद्धिक प्रतिकार

मध्य-पूर्व तनाव, तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर भारत की चिंता; BRICS देशों से व्यावहारिक सहयोग की अपील

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत ने एक बार फिर संतुलित और मजबूत कूटनीतिक संदेश दिया है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अन्य BRICS देशों की मौजूदगी में साफ कहा कि “स्थिरता चुनिंदा नहीं हो सकती।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पूरी दुनिया ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर चिंतित है।

भारत ने खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई। सरकार का मानना है कि इन समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जयशंकर ने BRICS देशों से अपील करते हुए कहा कि मौजूदा समय में अभूतपूर्व भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता से निपटने के लिए व्यावहारिक और सामूहिक रणनीति जरूरी है। उन्होंने एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव की राजनीति पर भी अप्रत्यक्ष चिंता जताई।

विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस समय पश्चिमी देशों और मध्य-पूर्वी देशों के बीच संतुलन बनाकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि भारत लगातार संवाद, स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग की बात कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत का यह रुख सिर्फ कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक आर्थिक हितों से जुड़ी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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