बौद्धिक प्रतिकार, भोपाल।राजधानी भोपाल में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत एक गंभीर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने एक पांच वर्षीय बालिका की पहचान सार्वजनिक करने के आरोप में दैनिक भास्कर के प्रबंध निदेशक (एमडी) सुधीर अग्रवाल एवं संबंधित रिपोर्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला मीडिया की जिम्मेदारी, बाल अधिकारों और संवेदनशील मामलों की रिपोर्टिंग को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
पुलिस के अनुसार प्रकाशित समाचार में कथित रूप से पॉक्सो पीड़िता बच्ची की पहचान से जुड़े ऐसे विवरण प्रकाशित किए गए, जिनसे उसकी पहचान उजागर होने की आशंका उत्पन्न हुई। आरोप है कि खबर में पीड़िता के घर का पता, स्कूल और परिवार से संबंधित जानकारी प्रकाशित की गई थी, जिससे कानून का उल्लंघन हुआ।
जांच अधिकारियों का कहना है कि पॉक्सो अधिनियम और भारतीय कानून के तहत किसी भी यौन अपराध से पीड़ित नाबालिग की पहचान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उजागर करना प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में मीडिया संस्थानों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला भोपाल के एमपी नगर थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया है। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण कायम कर जांच शुरू कर दी है। मामले में प्रकाशित सामग्री, समाचार की प्रकृति और उससे जुड़े तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो अधिनियम का उद्देश्य बच्चों की निजता और सम्मान की रक्षा करना है। किसी भी माध्यम से पीड़ित की पहचान उजागर होने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस घटना के बाद मीडिया जगत में भी संवेदनशील मामलों की रिपोर्टिंग को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध की जानकारी जनता तक पहुंचाना मीडिया का दायित्व है, लेकिन नाबालिग पीड़ितों की गोपनीयता बनाए रखना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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