नई दिल्ली। यूरोपीय संघ (EU) ने मत्स्य पालन उत्पादों के निरंतर निर्यात के लिए जारी संशोधित मसौदा सूची में भारत को शामिल कर लिया है। इससे भारतीय समुद्री उत्पादों के निर्यात को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में मदद मिलेगी।
दरअसल, यूरोपीय संघ के पूर्व विनियमन में भारत उन देशों की सूची में शामिल नहीं था, जिन्हें सितंबर 2026 से मानव उपभोग के लिए पशु उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी जानी थी। इससे भारतीय समुद्री उत्पाद निर्यातकों के सामने अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई थी। अब संशोधित मसौदा सूची में भारत को शामिल किए जाने के बाद यह चिंता काफी हद तक दूर हो गई है।
यूरोपीय संघ के नियमों के अनुसार, निर्यात किए जाने वाले पशु और पशु उत्पाद ऐसे होने चाहिए जिनमें वृद्धि संवर्धन के लिए रोगाणुरोधी दवाओं (Antimicrobials) का उपयोग न किया गया हो। साथ ही मानव उपचार के लिए आरक्षित एंटीमाइक्रोबियल दवाओं का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित रहेगा। इन मानकों का पालन करने वाले उत्पादों को ही यूरोपीय बाजार में प्रवेश मिलेगा।
भारत से बड़ी मात्रा में समुद्री उत्पाद यूरोपीय संघ के देशों को निर्यात किए जाते हैं। ऐसे में इस फैसले को भारतीय मत्स्य उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समुद्री खाद्य निर्यात को स्थिरता मिलेगी और हजारों निर्यातकों तथा मत्स्य पालकों को आर्थिक लाभ पहुंचेगा।

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