Top News

पेट्रोल-डीजल पर टैक्स की भूखी सरकार, महंगाई की आग में झोंका जा रहा मध्यम वर्ग!The government is hungry for taxes on petrol and diesel, the middle class is being thrown into the fire of inflation!

सम्पादकीय।बौद्धिक प्रतिकार

ईंधन महंगा तो हर चीज महंगी… लेकिन सत्ता को जनता की टूटी रसोई नहीं, सिर्फ टैक्स की कमाई दिख रही



देश का मध्यम वर्ग आज सबसे बड़ी आर्थिक मार झेल रहा है, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने अब सीधे बाजार पर हमला बोल दिया है। माल ढुलाई महंगी होने जा रही है, जिसका मतलब साफ है—राशन से लेकर सब्जी, दूध, दवा और रोजमर्रा का हर सामान अब और महंगा होगा। यानी कमाई वही, लेकिन खर्च हर महीने नया रिकॉर्ड बना रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आम आदमी कब तक सिर्फ टैक्स भरने की मशीन बना रहेगा? सरकारें हर बार अंतरराष्ट्रीय बाजार, युद्ध और वैश्विक संकट का बहाना बना देती हैं, लेकिन जनता पूछ रही है कि जब कच्चे तेल के दाम कम थे तब राहत क्यों नहीं मिली? और अब हर बार महंगाई का बोझ सीधे जनता की जेब पर ही क्यों डाला जा रहा है?

मध्यम वर्ग की हालत सबसे ज्यादा गंभीर हो चुकी है। न उसे मुफ्त योजनाओं का लाभ मिलता है और न ही बढ़ती महंगाई से कोई राहत। घर चलाने वाला व्यक्ति सुबह से रात तक सिर्फ हिसाब लगा रहा है—बच्चों की फीस भरे, बिजली बिल भरे, गैस सिलेंडर खरीदे या घर का राशन बचाए?

सरकारें विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि शहरों में ट्रैफिक, गांवों में बेरोजगारी और बाजार में महंगाई ने आम परिवार की कमर तोड़ दी है। ऊपर से ईंधन की कीमतों ने हर सेक्टर में आग लगा दी है। ट्रांसपोर्ट महंगा होगा तो व्यापारी कीमत बढ़ाएंगे और उसका सीधा असर जनता की थाली पर पड़ेगा।

चिंता की बात यह है कि सत्ता में बैठे लोग आंकड़ों का खेल दिखाकर हालात सामान्य बताने में जुटे हैं, जबकि जमीनी सच्चाई यह है कि लोगों की बचत खत्म हो रही है और कर्ज बढ़ रहा है। मध्यम वर्ग अब सुविधाएं नहीं मांग रहा, सिर्फ इतनी उम्मीद कर रहा है कि महीने के आखिर तक सम्मान से घर चला सके।

यदि सरकार ने समय रहते ईंधन पर टैक्स कम नहीं किया और बाजार नियंत्रण की ठोस नीति नहीं बनाई, तो आने वाले समय में महंगाई सिर्फ आर्थिक संकट नहीं, बल्कि सामाजिक असंतोष का बड़ा कारण बन सकती

Post a Comment

Previous Post Next Post