नई दिल्ली ।बौद्धिक प्रतिकार
8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर के रक्षा सिविल कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगें तेज कर दी हैं। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने साफ कहा है कि रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों को अब रेलवे कर्मचारियों के बराबर वेतन, प्रमोशन और सुविधाएं मिलनी चाहिए। संगठन ने न्यूनतम वेतन 69 हजार रुपये तय करने, 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने और पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग उठाई है।
डिफेंस कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से वे कठिन और जोखिम भरी परिस्थितियों में काम कर रहे हैं, लेकिन वेतन और सुविधाओं के मामले में लगातार भेदभाव झेलना पड़ रहा है। संगठन ने आरोप लगाया कि रक्षा प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को रेलवे और अन्य केंद्रीय विभागों की तुलना में कम अवसर और सीमित प्रमोशन मिलते हैं।
AIDEF ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष प्रस्तुत मांगपत्र में कहा है कि मौजूदा महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत को देखते हुए न्यूनतम वेतन में बड़ा इजाफा जरूरी है। कर्मचारियों का तर्क है कि यदि फिटमेंट फैक्टर 3.83 लागू होता है तो लाखों कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
संगठन ने जोखिम भत्ता बढ़ाने की भी मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि रक्षा प्रतिष्ठानों में कई कर्मचारी विस्फोटक सामग्री, हथियार और संवेदनशील उपकरणों के बीच काम करते हैं, लेकिन उन्हें जोखिम के अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
सबसे बड़ा मुद्दा पुरानी पेंशन योजना की बहाली को लेकर उठाया गया। AIDEF ने कहा कि नई पेंशन योजना (NPS) कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित नहीं करती और रिटायरमेंट के बाद आर्थिक असुरक्षा बढ़ा रही है। संगठन ने केंद्र सरकार से OPS को तत्काल लागू करने की मांग की।
डिफेंस कर्मचारियों की इन मांगों ने अब केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले समय में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर पूरे देश के केंद्रीय कर्मचारियों की नजर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति पर पड़ने वाला है।

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