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‘अब बहुत हुआ... आदेश का पालन करें’, मंत्री विजय शाह पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 25 मई को फिर सुनवाई'Enough is enough... follow the order', Supreme Court slams Minister Vijay Shah, hearing again on May 25




भोपाल/नई दिल्ली: की विवादित टिप्पणी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुका है। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान पर ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को तय की गई है।


सुनवाई के दौरान अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने साफ कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के मामलों में लापरवाही और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

“चार हफ्ते में कार्रवाई करें”

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि सरकार को यह तय करना होगा कि मंत्री के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद राज्य सरकार को अपनी स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।

सूत्रों के मुताबिक अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी न्याय व्यवस्था की गंभीरता को कमजोर करती है।

“अब बहुत हुआ... आदेश मानिए”

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की टिप्पणी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि “अब बहुत हुआ, अदालत के आदेश का पालन कीजिए।”


यह टिप्पणी तब आई जब अभियोजन स्वीकृति और कार्रवाई को लेकर लगातार देरी का मुद्दा उठा। अदालत ने संकेत दिए कि वह मामले को हल्के में लेने के पक्ष में नहीं है।

मंत्री के बयान पर अदालत की नाराजगी

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में बैठे नेताओं को शब्दों की मर्यादा समझनी चाहिए। अदालत ने माना कि महिला अधिकारियों और सेना से जुड़े लोगों को लेकर की गई टिप्पणियां बेहद संवेदनशील होती हैं।

जब मंत्री पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि बयान का गलत अर्थ निकाला गया, तब अदालत ने इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि अनुभवी जनप्रतिनिधियों को बोलते समय जिम्मेदारी और संवैधानिक मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।

राजनीतिक और कानूनी दबाव बढ़ा

मामले के तूल पकड़ने के बाद विपक्ष लगातार मंत्री विजय शाह के इस्तीफे की मांग कर रहा है। दूसरी ओर सरकार बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रही है। अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।


कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अदालत संतुष्ट नहीं हुई तो आने वाले दिनों में सरकार और मंत्री दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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