जैन मुनि आचार्य नयन पद्मसागर के मराठी और छत्रपति शिवाजी महाराज की बहू महारानी ताराबाई को लेकर दिया हालिया बयान विवादों में घिर गया है। इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। दरअसल जैन मुनि ने दावा किया कि मराठी भाषा की रचना जैन आचार्य ने की थी। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि औरंगजेब का नाश करने वाली महारानी ताराबाई भी जैन समुदाय से थीं।
जैन रानी थीं ताराबाई- आचार्य नयन पद्मसागर
महाराष्ट्र में एक बार फिर इतिहास को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जैन मुनी आचार्य नयन पद्मसागर के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। मुंबई के दादर इलाके में जैन समुदाय के एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि महारानी ताराबाई जैन समुदाय से थीं और उनका जन्म औरंगजेब के विनाश के लिए हुआ था। इस बयान के सामने आते ही पूरे राज्य में बहस तेज हो गई है।
मराठी भाषा को लेकर भी किया दावा
आचार्य नयन पद्मसागर ने अपने भाषण में यह भी दावा किया कि मराठी भाषा की रचना जैन आचार्य ने की है। उन्होंने कहा, “मराठी भाषा की रचना जैन आचार्य ने की थी। इसलिए कोई मराठी की दुहाई हमें नहीं दें। हमारे दिल में जितना मराठी का लहू बहता है, उतना किसी में नहीं। सच कहूं तो पूरे भारत में अगर सच्चे मराठी कोई है तो वो सारे के सारे जैन है। संत ज्ञानेश्वर जी ने ज्ञानेश्वरी में लिखा है कि मराठी भाषा की रचना एक जैन आचार्य ने की है। यहां तक की महाराष्ट्र के पाटिल जाति के लोग भी जैन धर्म का पालन करते है।“
डिप्टी सीएम शिंदे के सामने दिया गया विवादित बयान
मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम में आचार्य नयन पद्मसागर ने आक्रामक अंदाज में भाषण देते हुए कहा कि महाराणी ताराराणी जैन थीं। खास बात यह रही कि यह बयान उस मंच से दिया गया जहां महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के मुंबई अध्यक्ष अमित साटम भी मौजूद थे। इस वजह से यह विवाद और ज्यादा गहरा गया है।

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