इंदौर: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के फर्जी पत्र को वायरल करने के नाम पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है. उन्होंने कहा इस मामले को लेकर कांग्रेस अब आंदोलन की रणनीति तैयार कर रही है.
जीतू पटवारी ने कहा कि 15 अप्रैल को वसुंधरा राजे का एक पत्र वायरल हुआ और 4 दिन में उसे करोड़ों लोगों ने शेयर किया. इसके बाद इस पत्र को लेकर वसुंधरा राजे ने कहा कि यह मेरा पत्र नहीं है. अब इस पत्र को वायरल करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार बताकर एफआईआर की जा रही है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार को इंदौर में जानकारी देते हुए बताया कि "वसुंधरा राजे के 15 अप्रैल को वायरल पत्र को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया गया. इस पत्र की महिला आरक्षण को लेकर मूल भावना ठीक वही है जैसे लेकर कांग्रेस बिल का विरोध कर रही है. मोहन भागवत को संबोधित इस पत्र को हालांकि वसुंधरा राजे ने 4 दिन के बाद खुद ही ट्विट करके फर्जी बताया था लेकिन तब तक यह पत्र करोड़ों लोगों ने वायरल कर दिया था."
उन्होंने कहा "प्रदेश की मोहन सरकार ने इस पत्र को वायरल करने के लिए कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराकर उन्हें आईटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया है, जो कि भाजपा की दमनकारी नीति प्रदर्शित करता है. भाजपा सरकार की इसी नफरत भरी सोच से किसी को डरना नहीं है बल्कि पूरी ताकत से इसका मुकाबला करना है."
'खड़गे और राहुल गांधी ने लिखे 33 पत्र'
जीतू पटवारी ने महिला आरक्षण बिल का जिक्र करते हुए कहा, "महिला आरक्षण को लेकर खड़गे और राहुल गांधी ने 33 पत्र प्रधानमंत्री को लिखे हैं." उन्होंने कहा कि "अब से 23 साल पहले सोनिया गांधी संसद में महिला आरक्षण बिल लेकर आई थीं. राहुल गांधी ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया था, जिसे कांग्रेस पार्टी ने स्थानीय निकाय चुनाव में 50 प्रतिशत तक कर दिया."
प्रधानमंत्री मोदी पर उठाए सवाल
जीतू पटवारी ने एपिस्टिन फाइल को लेकर भी प्रधानमंत्री के ऊपर सवाल खड़े किए. प्रधानमंत्री मोदी को डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर होने तक के आरोप लगाए. उन्होंने यहां तक कह दिया कि हमारे देश का शासन ट्रंप क्यों चला रहे हैं? इसके अलावा, उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और किसानों की फसल के एमएसपी का मुद्दा भी उठाया.

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