दिल्ली। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) द्वारा समय-समय पर बुक्स में बदलाव किये जाते हैं। इसमें से कई अध्यायों को लेकर हमेशा से कोई न कोई विवाद होता रहा है। अब कक्षा 8वीं की पाठ्यपुस्तक से "मराठा साम्राज्य का नक्शा" हटा दिया गया है जिसका अब विरोध चालू हो गया है।
एनसीईआरटी ने क्या कहा?
एनसीईआरटी द्वारा बुक से मराठा मैप को हटाने के बाद कहा गया कि आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों से मराठा साम्राज्य का मानचित्र हटाने का निर्णय एक उच्चस्तरीय समिति के निष्कर्ष पर आधारित था, जिसमें यह पाया गया कि मानचित्र में व्यापक सामान्यीकरण के कारण समस्याएं हैं।
24 अप्रैल को प्रधानमंत्री कार्यालय के शिकायत पोर्टल पर सांगली के वकील विश्राम कदम द्वारा दायर शिकायत के जवाब में, एनसीईआरटी ने कहा कि समिति ने दो बैठकों में मानचित्र के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की और यह निर्णय लिया।
क्या था पूरा मामला
मराठा साम्राज्य के नक्शे में बीकानेर, बूंदी और जैसलमेर को इसका हिस्सा दिखाया गया था जिस पर विवाद था। इसके बाद जैसलमेर के पूर्व महारावल चैतन्यराज सिंह, राजपरिवार सदस्य विक्रम सिंह नाचना, उदयपुर के विश्वराज सिंह और राजसमंद सांसद महिमा कुमारी ने इस पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि जैसलमेर रियासत और मराठों के बीच कभी युद्ध भी नहीं हुआ और न ही मराठाओं ने यहां आक्रमण किया। ऐसे में इसे मराठा के नक्शे में दिखाना उचित नहीं है। इसी को लेकर NCERT ने बैठक कर इसे हटा दिया।
मराठाओं ने लगाया इतिहास मिटाने की कोशिश का आरोप
पाठ्यक्रम से मराठा नक्शे को हटाने के बाद अब छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशजों ने इसका विरोध किया है और उन्होंने कहा कि यह मराठा इतिहास को मिटाने की कोशिश की जा रही है। विश्राम कदम ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह निर्णय उचित जांच-पड़ताल के बिना लिया गया था, और वह एनसीईआरटी को मानचित्र को बहाल करने के निर्देश देने के लिए उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करेंगे।

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