इंदौर में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक निजी अस्पताल से जुड़े अवैध निर्माण को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें निगम अफसरों की कथित मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर बहुमंजिला निर्माण खड़ा कर दिया गया।
अस्पताल की आड़ में अवैध निर्माण
जानकारी के अनुसार, प्राइम लोकेशन पर स्थित एक अस्पताल के पीछे आवासीय अनुमति लेकर व्यावसायिक उपयोग के लिए निर्माण किया गया। आरोप है कि शुरुआत से ही यह परियोजना नियमों के खिलाफ थी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की।
फरवरी 2025 में हुआ था खुलासा
मामले का खुलासा फरवरी 2025 में हुआ था। इसके बाद भवन अधिकारी ने नोटिस जारी कर निर्माण पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका। इससे निगम की कार्यशैली और सख्ती पर सवाल उठने लगे हैं।
70 लोगों की जान खतरे में
रिपोर्ट के मुताबिक, निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। इससे आसपास रहने वाले करीब 70 लोगों की जान जोखिम में पड़ गई थी। स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत भी की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ब्लैकलिस्ट पर भी सवाल
निर्माण से जुड़ी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की बात सामने आई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं न कहीं अधिकारियों का संरक्षण इस पूरे मामले में शामिल है।
जिम्मेदारी तय होगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि:
क्या इस मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
अवैध निर्माण को हटाया जाएगा या उसे वैध बनाने की कोशिश होगी?
क्या निगम अपनी साख बचा पाएगा?
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों और कथित मिलीभगत का आईना है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामलों से शहर की सुरक्षा और व्यवस्था दोनों पर गंभीर खतरा बना रहेगा।

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