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3 लाख की एक डोज! क्यों है चर्चा में कैंसर इंजेक्शन? जानिए इसके पीछे की वजहA Single Dose Worth ₹3 Lakhs! Why Is This Cancer Injection Making Headlines? Find Out the Reason Behind It.

 

इन दिनों कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा Keytruda (पेम्ब्रोलिज़ुमैब) काफी चर्चा में है। वजह है इस दवा की कालाबाजारी और इसके नाम पर नकली दवाओं की बिक्री। इसे एक क्रांतिकारी इम्यूनोथेरेपी माना जाता है, जो शरीर की इम्यूनिटी को एक्टिव करके कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। यही वजह है कि इसे फेफड़ों, किडनी, सर्वाइकल और स्किन कैंसर (मेलानोमा) जैसे कई गंभीर मामलों में उपयोग किया जा रहा है। लेकिन जहां एक तरफ यह दवा मरीजों के लिए उम्मीद लेकर आई है, वहीं दूसरी तरफ इसकी पहुंच अब भी बेहद सीमित है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में ऐसे ही कुछ मरीजों का दर्द साझा किया गया है, जिनके यह दवा हासिल करना पहाड़ तोड़ने से कम नहीं रहा।


क्यों ट्रेंड में है यह इंजेक्शन?

हाल के समय में सोशल मीडिया, हेल्थ रिपोर्ट्स और मरीजों के अनुभवों की वजह से यह दवा चर्चा में आई है। कई मामलों में देखा गया है कि जहां पारंपरिक इलाज (कीमोथेरेपी) ज्यादा असरदार नहीं रहा, वहां इस इम्यूनोथेरेपी ने बेहतर परिणाम दिए। इसी कारण लोग इसे लाइफ सेविंग इंजेक्शन के तौर पर देखने लगे हैं।

कैसे काम करती है यह दवा?

Keytruda शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाती है ताकि वह कैंसर सेल्स को पहचानकर खत्म कर सके। यानी यह सीधे कैंसर को मारने के बजाय शरीर को लड़ने के लिए तैयार करती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह तरीका पारंपरिक इलाज से अलग और कई मामलों में ज्यादा असरदार साबित हो सकता है।

लेकिन इतनी आसान नहीं है इसकी पहुंच

भारत में इस दवा की एक डोज की कीमत 3 लाख रुपये से ज्यादा है। इलाज के दौरान हर 3 हफ्ते में इंजेक्शन लेना पड़ता है, जिससे कुल खर्च लाखों में पहुंच जाता है। कुछ मरीज पेशेंट एक्सेस प्रोग्राम के जरिए इसे कम कीमत में पा सकते हैं, लेकिन इसमें भी शुरुआत में करीब 10 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।

मरीजों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?

इलाज का बहुत ज्यादा खर्च

जटिल कागजी प्रक्रिया

अस्पताल और डॉक्टर की उपलब्धता

सही जानकारी की कमी

कई बार मरीजों को हर डोज से पहले फॉर्म, डॉक्यूमेंट और अप्रूवल की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे इलाज में देरी हो सकती है।

हेल्थ एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

डॉक्टरों के मुताबिक, यह दवा सच में प्रभावी है, लेकिन हर मरीज के लिए जरूरी नहीं कि यह काम करे। साथ ही, इसके साइड इफेक्ट्स और मरीज की स्थिति को ध्यान में रखकर ही इसे दिया जाता है।

कितने लोगों तक पहुंच पाती है यह दवा?

अनुमान के अनुसार, जिन मरीजों को इस दवा की जरूरत होती है, उनमें से सिर्फ 1-2% लोग ही इसका लाभ उठा पाते हैं। छोटे शहरों और गांवों में तो स्थिति और भी कठिन है। Keytruda जैसे इंजेक्शन आज के समय में कैंसर इलाज की नई उम्मीद जरूर हैं, लेकिन महंगा इलाज, जटिल सिस्टम और सीमित पहुंच इसे हर मरीज तक नहीं पहुंचने देते।

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