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कर्ज के दलदल में मध्य प्रदेश? ₹2800 करोड़ का नया लोन, कुल बोझ 4.14 लाख करोड़ के पार ?Madhya Pradesh in a debt quagmire? ₹2,800 crore in new loans, taking the total burden to over ₹4.14 lakh crore?

प्रणव बजाज



भोपाल से आई ताजा खबर ने राज्य की आर्थिक हालत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। Mohan Yadav सरकार आज खुले बाजार से ₹2800 करोड़ का नया कर्ज लेने जा रही है। इसके साथ ही प्रदेश पर कुल कर्ज बढ़कर करीब ₹4 लाख 14 हजार करोड़ के पार पहुंच चुका है।

यह पहला मौका नहीं है जब मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल उठे हैं। पिछले कुछ सालों में लगातार कर्ज लेने का सिलसिला जारी रहा है। बजट दस्तावेजों और पूर्व रिपोर्ट्स में भी यह सामने आता रहा है कि राज्य का कर्ज तेजी से बढ़ा है, जबकि जमीनी स्तर पर विकास को लेकर जनता में असंतोष बना हुआ है।

विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि सरकार कर्ज तो ले रही है, लेकिन उसका असर न तो सड़कों पर दिख रहा है और न ही बिजली व्यवस्था में सुधार के रूप में। कई ग्रामीण इलाकों में खराब सड़कें और बिजली कटौती जैसे मुद्दे अब भी जस के तस बने हुए हैं। इन हालातों की तुलना विपक्ष Digvijaya Singh के दौर से करते हुए सरकार को घेर रहा है।

दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, निवेश और योजनाओं के लिए कर्ज लेना जरूरी होता है। सरकार का दावा है कि लिए गए लोन का उपयोग दीर्घकालिक विकास और रोजगार बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।

आर्थिक जानकारों की मानें तो समस्या सिर्फ कर्ज लेना नहीं, बल्कि उसका सही इस्तेमाल और पारदर्शिता है। अगर कर्ज उत्पादक क्षेत्रों में लगे तो राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है, लेकिन यदि इसका सही प्रबंधन न हो तो यह भविष्य में बड़ा वित्तीय संकट भी बन सकता है।

प्रदेश में बढ़ते कर्ज, जमीनी समस्याओं और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह मुद्दा अब जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस आर्थिक दबाव को कैसे संभालती है और क्या वास्तव में विकास के दावे जमीन पर नजर आते हैं या नहीं।

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