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टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में क्यों बढ़ रहा लिवर फाइब्रोसिस का खतरा? जानें क्या कहती है नयी स्टडीWhy is the risk of liver fibrosis rising among patients with Type 2 diabetes? Find out what a new study reveals.

 

किसी व्यक्ति में टाइप 2 डायबिटीज का पता चलता है, तो डॉक्टर आमतौर पर तीन चीजों की रेगुलर जांच तय करते हैं (ब्लड शुगर लेवल, किडनी का काम और आंखों की सेहत) ताकि रेटिनोपैथी जैसी दिक्कतों का शुरुआती दौर में ही पता लगाया जा सके. दरअसल, रेटिनोपैथी एक ऐसी स्थिति है जिसमें हाई ब्लड शुगर का लेवल आंखों की छोटी-छोटी ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचाता है. डायबिटीज की इन तीन जानी-मानी दिक्कतों के अलावा, डायबिटीज की इन तीन जानी-मानी दिक्कतों के अलावा, इस महीने 'द लैंसेट रीजनल हेल्थ–साउथईस्ट एशिया' में छपी एक नई स्टडी में एक "चौथी दिक्कत" के बारे में बताया गया है.


भारत भर के डायबिटीज क्लीनिक में की गई 'डायफाइब-लिवर स्टडी', जिसमें 9,000 से ज्यादा मरीज शामिल थे, अब यह तर्क देती है कि नेशनल हेल्थ प्रोग्राम में लिवर फाइब्रोसिस (यानी लिवर पर निशान) की भी स्क्रीनिंग होनी चाहिए. अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह लिवर की गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है.

रिसर्चर्स ने पाया कि इस स्टडी में शामिल टाइप 2 डायबिटीज वाले हर चार में से एक एडल्ट के लिवर पर काफी निशान थे, और बीस में से एक को पहले से ही सिरोसिस होने की संभावना थी, एक ऐसी कंडीशन जिसमें लिवर बुरी तरह डैमेज हो चुका होता है. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इनमें से लगभग किसी भी मरीज को इस समस्या के बारे में पता नहीं था.

लिवर फाइब्रोसिस क्या है

लिवर शरीर का सबसे बड़ा अंदरूनी अंग होता है. जब यह ज्यादा फैट, हाई ब्लड शुगर या शराब से बार-बार डैमेज होता है, तो यह स्कार टिशू बनाकर खुद को ठीक करने की कोशिश करता है. समय के साथ, यह स्कार टिशू बनता जाता है, और यह फाइब्रोसिस में बदल जाता है.

शुरुआती स्टेज में, इसके कोई लक्षण नहीं दिखते. लेकिन, जैसे-जैसे स्कार बढ़ते हैं, लिवर धीरे-धीरे काम करने की अपनी क्षमता खो देता है. जब डैमेज बहुत ज्यादा हो जाता है, तो इस स्थिति को सिरोसिस कहा जाता है, जिस समय लिवर खुद को ठीक नहीं कर पाता. इससे लिवर फेलियर, अंदरूनी ब्लीडिंग और लिवर कैंसर हो सकता है.

डायबिटीज लिवर फाइब्रोसिस में कैसे योगदान देता है?

इस स्टडी के अनुसार, डायबिटीज इस प्रोसेस को तेज कर देती है. हाई ब्लड शुगर, और साथ ही इंसुलिन रेजिस्टेंस, लिवर में फैट जमा होने को बढ़ावा देते हैं, जिससे पुरानी सूजन शुरू हो जाती है और फाइब्रोसिस की स्थिति पैदा हो जाती है. अब, इसे औपचारिक रूप से ‘मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD)’ कहा जाता है, हालांकि ज्यादातर लोग इसे अभी भी फैटी लिवर डिजीज के नाम से ही जानते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, फैटी लिवर एक महामारी बन गया है. फैटी लिवर का एक अहम कारण डायबिटीज है.

अध्ययन में यह बात सामने आई कि टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में न सिर्फ फैटी लिवर डिजीज होने की संभावना ज्यादा होती है, बल्कि उनमें लिवर में गंभीर घाव (स्कारिंग) और सिरोसिस की स्थिति भी तेजी से बढ़ती है. इस वजह से, डायबिटीज के साथ जी रहे करोड़ों लोगों के लिए लिवर की बीमारी एक बेहद गंभीर और अक्सर नजर न आने वाला खतरा बन जाती है. दुनिया भर में 50 करोड़ से ज्यादा वयस्क टाइप 2 डायबिटीज से प्रभावित हैं, और यह संख्या 2045 तक 78 करोड़ से अधिक होने की उम्मीद है, इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कम आय वाले देशों में होने का अनुमान है.

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