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डॉलर की मजबूती और तेल के दाम में आग से सहमा रुपया, धड़ाम से गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा Shaken by the strengthening dollar and soaring oil prices, the rupee plummets to a record low.


मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारतीय मुद्रा पर भी साफ दिखाई दे रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, मजबूत डॉलर और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण गुरुवार को भारतीय रुपया दबाव में आ गया. हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन Indian Rupee अमेरिकी मुद्रा US Dollar के मुकाबले गिरकर 92.36 के स्तर तक पहुंच गया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.25 पर खुला और आगे गिरते हुए 92.32 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले बंद स्तर से करीब 31 पैसे कमजोर है. एक दिन पहले रुपया 92.01 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.



गिरावट की मुख्य वजह

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, रुपये में कमजोरी के पीछे कई कारण हैं: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली और घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट.

वैश्विक तेल मानक Brent Crude करीब 9.94% बढ़कर 101.12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. शेयर बाजार का हाल घरेलू बाजार में भी दबाव देखने को मिला. BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 992.53 अंक गिरकर 75,871.18 पर पहुंच गया. NSE Nifty 50 310.55 अंक टूटकर 23,556.30 के स्तर पर आ गया. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने बुधवार को 6,267.31 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

रुपये पर इतना दबाव क्यों

भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से ज्यादा आयात करता है. इसलिए जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो देश का आयात बिल बढ़ जाता है और तेल कंपनियों को ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है. इससे Indian Rupee पर सीधा दबाव बढ़ जाता है. वैश्विक घटनाओं का असर तेल की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है जब Iraq के समुद्री क्षेत्र में एक तेल टैंकर पर हमला होने की खबर आई है.

इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहा और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है.

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