मध्य प्रदेश के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों ने अपनी अचल संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक कर दिया है। इस घोषणा में कई वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्ति का ब्यौरा सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) कैंपा मनोज अग्रवाल सबसे अधिक 12.61 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं।
उनकी संपत्ति से सालाना लगभग 5.50 लाख रुपये की आय होती है। वहीं मध्य प्रदेश के वन बल प्रमुख सुभारंजन सेन के नाम अपेक्षाकृत कम संपत्ति दर्ज की गई है। उनके और उनकी पत्नी के नाम भोपाल के दामखेड़ा क्षेत्र में 42 लाख रुपये का एक मकान है।
राज्य के कई वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों की संपत्ति का यह विवरण प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें विभिन्न अधिकारियों द्वारा देश के अलग-अलग शहरों में खरीदी गई जमीन, मकान और फ्लैट की जानकारी सामने आई है।
मनोज अग्रवाल के पास सबसे अधिक संपत्ति
पीसीसीएफ कैंपा Manoj Agrawal के पास कुल 12.61 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति घोषित की गई है। इनकी संपत्तियां उत्तर प्रदेश, दिल्ली, भोपाल और अन्य शहरों में फैली हुई हैं।
नोएडा के गौतम बुद्ध नगर में उनके नाम 2222 वर्गफुट का भूखंड है जिसकी कीमत लगभग एक करोड़ रुपये बताई गई है। इससे सालाना करीब 1.70 लाख रुपये की आय होती है। इसके अलावा गाजियाबाद के शिप्रा सन सिटी में स्वयं और पत्नी के नाम 50 लाख रुपये का फ्लैट है, जिससे सालाना लगभग 2.50 लाख रुपये की आय होती है।
उन्हें लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में पिता से विरासत में करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य का मकान भी मिला है। इसके अतिरिक्त झालू गांव में विरासत में मिली दुकान और मकान की कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई गई है।
भोपाल के बागमुगलिया क्षेत्र में उनके नाम करीब 1.50 करोड़ रुपये का मकान है। इसके अलावा संजीव नगर में स्वयं और पत्नी के नाम 40 लाख रुपये का भूखंड भी है। दिल्ली के द्वारका सेक्टर-11 में 60 लाख रुपये का फ्लैट भी उनके नाम है, जिससे सालाना लगभग तीन लाख रुपये की आय होती है।
उनकी पत्नी प्रियंका अग्रवाल के नाम कटनी में 20 लाख रुपये का भूखंड, भोपाल के खजूरी कला में 60.51 लाख रुपये का भूखंड और बरखेड़ा में 20 लाख रुपये का भूखंड दर्ज है। नोएडा के ग्रीन विश टाउन में 75 लाख रुपये का एक फ्लैट भी है जिससे सालाना 3.60 लाख रुपये की आय होती है।
वन बल प्रमुख सुभरंजन सेन की संपत्ति
मध्य प्रदेश के वन बल प्रमुख Subharanjan Sen के नाम अपेक्षाकृत सीमित संपत्ति दर्ज की गई है। भोपाल के दामखेड़ा क्षेत्र में स्वयं और उनकी पत्नी के नाम लगभग 42 लाख रुपये मूल्य का एक मकान है।
समीता राजौरा की संपत्ति
पीसीसीएफ एवं राज्य लघुवनोपज संघ की प्रबंध संचालक Samita Rajoura के नाम भोपाल के सेमरी गांव में लगभग 75 लाख रुपये का भूखंड दर्ज है। इसके अलावा उन्होंने गुजरात के अहमदाबाद में 21.65 लाख रुपये में एक प्लॉट खरीदा था, हालांकि उसका वर्तमान मूल्य सार्वजनिक नहीं किया गया है।
बिंदु शर्मा के पास दिल्ली में फ्लैट
पीसीसीएफ उत्पादन Bindu Sharma के नाम दिल्ली के जंगपुरा क्षेत्र में एक फ्लैट दर्ज है। यह फ्लैट उनके और उनके आईपीएस पति ए. साईं मनोहर के संयुक्त नाम पर है जिसकी कीमत करीब 3.60 करोड़ रुपये बताई गई है। इस संपत्ति से उन्हें सालाना लगभग 17.13 लाख रुपये की आय होती है।
बीएस अन्निगिरी की संपत्ति
पीसीसीएफ मानव संसाधन एवं विकास B S Annigiri के नाम इंदौर के आंबेडकर नगर स्थित वृंदावन फेस-1 में 11 लाख रुपये का आवासीय मकान है। इसके अलावा वहीं स्वयं और पत्नी के नाम 12.50 लाख रुपये का एक प्लॉट भी दर्ज है।
एचयू खान के पास 2.25 करोड़ की संपत्ति
पीसीसीएफ एवं वन विकास निगम के प्रबंध संचालक H U Khan के पास कुल 2.25 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की गई है। गुना में स्वयं और उनकी मां के नाम 1.25 करोड़ रुपये का आवासीय मकान है जो उन्हें विरासत में मिला है। इससे सालाना लगभग दो लाख रुपये की आय होती है।
इसके अलावा गुना के गुलाबगंज में 15 लाख रुपये का एक प्लॉट भी विरासत में मिला है। भोपाल की इंदिरा विहार कॉलोनी में उनके नाम लगभग 85 लाख रुपये का एक प्लॉट भी दर्ज है।
अन्य अधिकारियों की संपत्ति
पीसीसीएफ अनुसंधान एवं विस्तार बिभाष कुमार ठाकुर के पास लगभग 1.45 करोड़ रुपये की संपत्ति है जिससे सालाना 3.34 लाख रुपये की आय होती है।
पीसीसीएफ विकास पुरुषोत्तम धीमन के पास लगभग 1.76 करोड़ रुपये की संपत्ति है। इसमें हिमाचल प्रदेश और नोएडा में भूमि व आवासीय संपत्तियां शामिल हैं।
वहीं एपीसीसीएफ अर्चना शुक्ला के पास करीब 2.50 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है। भोपाल के बागसेवनिया स्थित एमराल्ड पार्क में उनके और उनके पति आईएएस अधिकारी शिवशेखर शुक्ला के नाम 1.25 करोड़ रुपये का डुप्लेक्स है। इसके अलावा टीटी नगर के तुलसी टावर में 1.25 करोड़ रुपये का एक फ्लैट भी दर्ज है।
पारदर्शिता के लिए घोषित की गई संपत्ति
वन विभाग के अधिकारियों द्वारा अचल संपत्ति की घोषणा प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वरिष्ठ अधिकारी अपनी संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक कर रहे हैं, जिससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है।

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