“घोटाले भी… संरक्षण भी!”
अफसरों पर आरोप, लेकिन कार्रवाई आधी-अधूरी?
किन अधिकारियों पर आरोप, कौन कार्रवाई में और कौन सवालों में?
भोपाल। मध्यप्रदेश में प्रशासनिक सिस्टम पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री Mohan Yadav की सरकार के दौरान कई मामलों में अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें भ्रष्टाचार, गड़बड़ी और कार्रवाई में देरी को लेकर विवाद बना हुआ है।
🔴 1. पुलिस रिश्वत कांड – नाम सहित बड़ा खुलासा
गुना में सामने आए ₹20 लाख रिश्वत कांड में कई पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आए:
अंकित सोनी – SP, गुना (ट्रांसफर किया गया)
प्रभात कटारे – SHO, धरनावदा (सस्पेंड)
साजिद हुसैन – ASI (सस्पेंड)
देवेंद्र सिंह सिकरवार – हेड कॉन्स्टेबल (सस्पेंड)
सुंदर रमन – कॉन्स्टेबल (सस्पेंड)
👉 आरोप: ₹1 करोड़ की जब्ती में गड़बड़ी, ₹20 लाख लेकर मामला दबाया गया
👉 सवाल:
इतनी बड़ी घटना पहले क्यों नहीं सामने आई?
क्या सिस्टम स्तर पर ढिलाई या संरक्षण था?
🔴 2. “घोस्ट टीचर” घोटाला – शिक्षा विभाग के अधिकारी
जबलपुर में ₹1.11 करोड़ के घोटाले में:
ब्लॉक शिक्षा कार्यालय के कर्मचारी/अधिकारी शामिल
6 सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार
👉 सॉफ्टवेयर में हेराफेरी कर फर्जी शिक्षक बनाकर वेतन निकाला गया
👉 अभी कई अधिकारियों की भूमिका जांच में है
🔴 3. फर्जी मार्कशीट से नौकरी – नाम सामने
STF जांच में 8 सरकारी शिक्षकों के नाम सामने आए:
गंधर्व सिंह रावत
साहेब सिंह कुशवाह
बृजेश रोरिया
महेंद्र सिंह रावत
लोकेन्द्र सिंह
रूबी कुशवाह
रविंद्र सिंह राणा
अर्जुन सिंह चौहान
👉 पोस्ट: विभिन्न जिलों में सरकारी शिक्षक
👉 आरोप: फर्जी D.Ed मार्कशीट से नौकरी
👉 सवाल:
नियुक्ति के समय जांच क्यों नहीं हुई?
क्या अंदरूनी मिलीभगत थी?
🔴 4. हाईकोर्ट की टिप्पणी – “अफसर बचाने” पर संकेत
Madhya Pradesh High Court ने एक मामले में कहा:
👉 कार्रवाई में “ईमानदारी की कमी”
आरोप: वरिष्ठ अधिकारी को सख्त सजा से बचाया गया
प्रमुख सचिव (GAD) की भूमिका पर सवाल
👉 हालांकि संबंधित अधिकारी का नाम सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया
🔴 5. पुराने बड़े घोटालों की छाया
मध्यप्रदेश में पहले भी बड़े स्तर पर अधिकारियों की भूमिका सामने आ चुकी है, जैसे:
Vyapam scam
इसमें अधिकारी, नेता और दलालों का नेटवर्क सामने आया था
इससे यह धारणा बनी कि सिस्टम में अंदर तक नेटवर्क काम करता है
🔴 6. शिकायतें हजारों, कार्रवाई कम
हजारों शिकायतें दर्ज
बहुत कम मामलों में FIR
इससे यह सवाल उठता है कि
क्या सभी मामलों में समान कार्रवाई हो रही है?
बड़ा सवाल (फ्रंट पेज लाइन)
नाम सामने आ रहे हैं… कार्रवाई भी हो रही है…
लेकिन क्या हर मामले में सच्चाई पूरी बाहर आ रही है?
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में अब मुद्दा सिर्फ घोटालों का नहीं है, बल्कि
जांच की पारदर्शिता
अधिकारियों की जवाबदेही
और राजनीतिक निष्पक्षता
पर है।
जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल:
“कौन बच रहा है… और क्यों?”

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