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शराब ठेका निष्पादन में फेल, जिलों पर शासन की नजर, नोकरशाहो की कुर्सी खतरे में!Liquor Contract Execution Fails; Government Keeps a Watch on Districts—Bureaucrats' Positions at Risk!

 

आबकारी में डबल चार्ज और ठेका निष्पादन में कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों की गोपनीय समीक्षा, प्रशासनिक सर्जरी की आहट

भोपाल। प्रदेश में शराब दुकानों के ठेका निष्पादन की प्रक्रिया के बीच अचानक एक नई हलचल ने आबकारी विभाग और प्रशासनिक गलियारों में सस्पेंस पैदा कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, जिन जिलों में ठेका निष्पादन अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाया या जहां बार-बार प्रक्रिया विफल होती रही, उन जिलों को अब शासन ने गंभीरता से चिन्हित कर लिया है।


बताया जा रहा है कि इस विषय पर की गई शिकायत (हमारे द्वारा) के बाद शासन स्तर पर पूरी स्थिति की गोपनीय समीक्षा शुरू हो गई है। खासकर वे जिले जहां अधिकारी एक साथ दो-दो जिलों का प्रभार यानी डबल चार्ज संभाल रहे हैं, वहां की प्रशासनिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। साथ ही बड़े संभागीय जिले भी निशाने पर है!

सूत्रों की मानें तो ठेका निष्पादन जैसे महत्वपूर्ण और राजस्व से जुड़े कार्य के दौरान कई जिलों में नेतृत्व की कमी साफ दिखाई दी। कुछ स्थानों पर निर्णय लेने में देरी हुई तो कहीं प्रक्रिया बार-बार अटकती रही। ऐसे में अब शासन जवाबदेही तय करने के मूड में दिखाई दे रहा है।

अंदरखाने चर्चा यह भी है कि जिन जिलों में प्रदर्शन कमजोर रहा है, वहां जल्द ही प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि शासन ऐसे अधिकारियों को हटाने या उनके स्थान पर नए अधिकारियों की नियुक्ति पर विचार कर रहा है...

हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन विभागीय हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि “फाइलें चल चुकी हैं” और कुछ जिलों में अफसरों की कुर्सियां हिलना लगभग तय माना जा रहा है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह समीक्षा केवल चेतावनी बनकर रह जाएगी या फिर वाकई कुछ जिलों में प्रशासनिक सर्जरी देखने को मिलेगी।

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