भोपाल। National Medical Commission (एनएमसी) ने भोपाल स्थित RKDF Medical College Hospital & Research Centre पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह कार्रवाई मेडिकल छात्रों और इंटर्न को दिए जाने वाले स्टाइपेंड से संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने के कारण की है।
जानकारी के अनुसार एनएमसी ने देश के सभी मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिए थे कि वे एमबीबीएस इंटर्न और पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों को दिए जाने वाले स्टाइपेंड का पूरा विवरण आयोग के पोर्टल और अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करें। लेकिन आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज द्वारा कई बार नोटिस दिए जाने के बाद भी आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
एनएमसी का कहना है कि कॉलेज द्वारा निर्देशों की अनदेखी किए जाने पर नियमों के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल शिक्षा से जुड़े संस्थानों को पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है और छात्रों के अधिकारों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि कॉलेज भविष्य में भी नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें नए दाखिलों पर रोक या मान्यता से जुड़ी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
बताया जा रहा है कि इसी तरह के मामले में देश के कुछ अन्य मेडिकल कॉलेजों पर भी एनएमसी ने कार्रवाई की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी
बता दें कि स्टाइपेंड का भुगतान करना हर मेडिकल कॉलेज की कानूनी जिम्मेदारी है। यह छात्रों की मेहनत और उनके संवैधानिक अधिकारों का मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में पहले ही स्पष्ट आदेश दिए हैं। भावना तिवारी बनाम उत्तर प्रदेश टाज्य मामले में कोर्ट सख्त था। अभिषेक यादव बनाम आर्मी कॉलेज केस में भी यही निर्देश थे। इन सभी मामलों के आधार पर इंटर्न्स को स्टाइपेंड देना अनिवार्य है। आरकेडीएफ कॉलेज ने इन न्यायिक फैसलों का खुला उल्लंघन किया है।
इन 7 कॉलेजों पर हुआ एक्शन
एनएमसी ने केवल आरकेडीएफ कॉलेज (आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज भोपाल) पर ही कार्रवाई नहीं की है। इस सूची में देश के छह अन्य बड़े संस्थान भी शामिल हैं। आयोग ने प्रत्येक संस्थान पर एक-एक करोड़ का जुर्माना लगाया है। ये सभी कॉलेज स्टाइपेंड की जानकारी साझा करने में विफल रहे। आयोग ने गहन जांच के बाद इन सात कॉलेजों को चुना।
आकाश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बेंगलोर, कर्नाट
दुमका मेडिकल कॉलेज, दिघी, झारखंड
राजकीय मेडिकल कॉलेज, बाड़मेट, टाजस्थान
राजकीय मेडिकल कॉलेज, ओंगोल, आंध्र प्रदेश
आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज अस्पताल, भोपाल, मध्य प्रदे
प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पंडित बी.डी. शर्मा पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट, रोहतक, हरियाणा
इन सभी संस्थानों ने पारदर्शिता बरतने में बड़ी लापरवाही की है। आयोग ने इनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की है। इन कॉलेजों को अब अपनी वेबसाइट पर विवरण देना होगा।
एडमिशन बंद होने का भी खतरा
भारी जुर्माने के बाद आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज पर बड़ी मुसीबत मंडरा रही है। यह संस्थान की शैक्षणिक साख के लिए बड़ा झटका होगा। छात्रों के भविष्य पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा। एनएमसी ने साफ किया है कि वह आगे और कठोर होगा।
रिफरेंसः
एनएमसी पब्लिक नोटिस संख्या U-22370-Legal-UGMEB दिनांक 12-03-20261
एनएमसी नोटिस दिनांक 13-03-2026, हस्ताक्षर डॉ. राघव लंगर।
एनएमसी एक्ट 2019 और पीजीएमईआर रेगुलेशन 20231
FAQ
1. भोपाल के आरकेडीएफ कॉलेज पर जुर्माना क्यों लगा?
आरकेडीएफ कॉलेज ने एमबीबीएस इंटर्स और पीजी टेजिडेंट्स के स्टाइपेंड की जानकारी नहीं दी थी। कॉलेज ने वेबसाइट पर यह विवरण साझा करने के नियमों का उल्लंघन किया था। एनएमसी के बार-बार नोटिस भेजने पर भी कोई जवाब नहीं दिया गया था। इसी लापरवाही के कारण आयोग ने एक करोड़ का जुर्माना लगाया है।
2. क्या जुर्माने के बाद कॉलेज की मान्यता रद्द हो सकती है?
हां, यदि कॉलेज ने नियमों में सुधार नहीं किया तो कार्रवाई होगी। एनएमसी नए एडमिशन पर पूरी तरह रोक लगा सकता है। साथ ही कॉलेज की मान्यता को पूरी तरह निलंबित किया जा सकता है। आयोग ने नोटिस में इस दंड का स्पष्ट जिक्र किया है।


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