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Tirupati घोटाले में 36 आरोपी; CBI बोली- घी के नाम पर खिलाया जा रहा था केमिकल और पाम ऑयल36 accused in the Tirupati scam; CBI says chemicals and palm oil were being sold in the name of ghee.

 

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के लड्डू प्रसादम में मिलावट के जिस मुद्दे ने पूरे देश की आस्था और राजनीति को झकझोर कर रख दिया था उसमें अब एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष जांच टीम (SIT) ने नेल्लोर की अदालत में अपनी अंतिम चार्जशीट पेश कर दी है। इस चार्जशीट में 36 लोगों को आरोपी बनाया गया है लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस 'एनिमल फैट' (जानवरों की चर्बी) को लेकर भारी बवाल मचा था उसे लेकर जांच रिपोर्ट में नई कहानी सामने आई है।


केमिकल का जाल और नकली घी का खेल

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार भक्तों को गाय का शुद्ध घी बताकर जो खिलाया जा रहा था वह दरअसल एक 'केमिकल स्लग' (रासायनिक कीचड़) था। जांच में पाया गया कि उत्तराखंड की 'भोले बाबा डेयरी' ने 2021 से 2024 के बीच करीब 68 लाख किलो नकली घी सप्लाई किया जिसकी कीमत 250 करोड़ रुपये के करीब है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस डेयरी ने इस दौरान दूध या मक्खन की एक बूंद भी नहीं खरीदी।

घी के नाम पर पाम ऑयल, कर्नल ऑयल और कई तरह के घातक रसायनों का मिश्रण तैयार किया गया था। दिल्ली के एक व्यापारी अजय कुमार सुगंध पर आरोप है कि उसने इस नकली मिश्रण को असली घी जैसा स्वाद, खुशबू और प्रयोगशाला मानकों पर खरा उतारने के लिए 'एसिटिक एसिड एस्टर' जैसे केमिकल सप्लाई किए।

एनिमल फैट की सच्चाई: क्या था और क्या नहीं?

चार्जशीट में स्पष्ट किया गया है कि लड्डू बनाने के मुख्य स्टॉक में जानवरों की चर्बी की पुष्टि नहीं हुई है बल्कि वह पूरी तरह से वनस्पति तेलों और रसायनों का एक 'सिंथेटिक' जाल था। हालांकि जांच टीम ने उन टैंकरों में लार्ड (सूअर की चर्बी) और टैलो (बीफ फैट) के अंश पाए जिन्हें खराब गुणवत्ता के कारण रिजेक्ट किया गया था। आरोप है कि रिजेक्ट होने के बाद भी इन टैंकरों को रिसाइकिल करके चोरी-छिपे वापस सप्लाई चेन में घुसा दिया गया था।

मंदिर के रक्षक ही बने भक्षक?

इस महाघोटाले में मंदिर के उन अधिकारियों की भूमिका सबसे शर्मनाक रही जिन पर शुद्धता की जिम्मेदारी थी। चार्जशीट में TTD के पूर्व जनरल मैनेजर (खरीद) आरएसएसवीआर सुब्रमण्यम सहित 9 अधिकारियों और 5 डेयरी विशेषज्ञों के नाम शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने रिश्वत और महंगे उपहारों के बदले में:

नकली घी को 'शुद्ध' बताने वाली फर्जी रिपोर्ट जारी की।

मिलावट के सबूतों को जानबूझकर दबाया।

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के मानकों की अनदेखी की (जहां शुद्धता का मानक 98-104 होना चाहिए, वहां जांच में यह महज 19.72 पाया गया)। 

राजनीति और आस्था के बीच का टकराव

यह पूरा विवाद सितंबर 2024 में तब शुरू हुआ था जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पिछली जगन मोहन रेड्डी सरकार पर आरोप लगाया था कि उनके शासनकाल में प्रसादम में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल हुआ। इस दावे ने पूरे देश में एक बड़ा धार्मिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था। अब सीबीआई की चार्जशीट ने स्पष्ट किया है कि भले ही प्रसादम में सीधे तौर पर चर्बी के सबूत न मिले हों लेकिन आस्था के साथ खिलवाड़ करने के लिए 'बिना दूध वाला केमिकल घी' खिलाना उससे भी बड़ा अपराध और भ्रष्टाचार था।

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