नई दिल्ली: 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों पड़ोसियों के आपसी रिश्तों में सबसे ज्यादा गिरावट जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की कोशिशों के बाद हुई हिंसक झड़प की वजह से आई थी। इसकी वजह से आपसी संबंधों में इतनी दूरी आ गई, जिसे दोबारा पटरी पर लाने की कोशिशों में करीब पांच साल गुजर गए। ऐसे में सोमवार को जब चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) का एक प्रतिनिधिमंडल बीजेपी नेताओं से मुलाकात के लिए दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पहुंचा तो यह बहुत चौंकाने वाला लगा।
चीन की सत्ताधारी चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया है। यह पहले बीजेपी मुख्यालय गया और फिर दिल्ली स्थिति आरएसएस का मुख्य कार्यालय पहुंच रहा है। गलवान घाटी की घटना के बाद इस तरह की कूटनीतिक और सियासी बैठकों के मायने अहम हैं।

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