सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में MBBS और BDS कोर्स में स्पोर्ट्स कोटा एडमिशन के लिए विचार क्षेत्र के बीच में किए गए विस्तार को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने के बाद एडमिशन के नियमों को बदलना संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत निष्पक्षता, पारदर्शिता और मनमानी न करने के तय सिद्धांतों का उल्लंघन है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों से जुड़ी सिविल अपीलों के एक बैच को अनुमति दी, जिसमें 2024 सेशन के दौरान एडमिशन के लिए क्लास XI और XII के अलावा क्लास IX और X की खेल उपलब्धियों को शामिल करने की चुनौती को खारिज कर दिया गया।
मामले की पृष्ठभूमि ये अपीलें 2024 सेशन के लिए पंजाब में 1 प्रतिशत स्पोर्ट्स कोटा के तहत MBBS और BDS कोर्स में एडमिशन से संबंधित थीं। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज द्वारा 09 अगस्त, 2024 को जारी किए गए प्रॉस्पेक्टस में साफ तौर पर कहा गया कि केवल क्लास XI और XII के दौरान की खेल उपलब्धियों के लिए ही क्रेडिट दिया जाएगा। हालांकि, आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख पर यूनिवर्सिटी ने 16 अगस्त 2024 को शाम 6.07 बजे ईमेल जारी किया, जिसमें उम्मीदवारों से किसी भी क्लास या साल की खेल उपलब्धियों को जमा करने के लिए कहा गया। इसके बाद एक सप्लीमेंट जारी किया गया और एक स्पोर्ट्स मेरिट लिस्ट तैयार की गई, जिसमें क्लास IX और X की उपलब्धियों को भी ध्यान में रखा गया। उस आधार पर कुदरत कश्यप और मनसीरत कौर को अपीलकर्ताओं दिवजोत सेखों और शुभकर्मन सिंह से ऊपर रैंक दी गई। सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्ष कोर्ट ने कहा कि एडमिशन प्रक्रिया मनमानी और पारदर्शिता की कमी से दूषित थी। इसने इस तय सिद्धांत को दोहराया कि "एक बार खेल शुरू होने के बाद खेल के नियम नहीं बदले जा सकते", यह देखते हुए कि यह सिद्धांत भर्ती प्रक्रियाओं पर भी उतना ही लागू होता है जितना कि एडमिशन प्रक्रियाओं पर। बेंच ने कहा कि हालांकि राज्य के 01 अगस्त, 2023 के शुद्धिपत्र ने विचार क्षेत्र का विस्तार करके क्लास IX और X को शामिल किया, लेकिन यह COVID-19 के कारण स्पष्ट रूप से 2023 सेशन तक ही सीमित था। 2024 में उस छूट को जारी रखने का कोई कारण नहीं था। खास बात यह है कि कोर्ट ने पाया कि पॉलिसी में बदलाव रमेश कुमार कश्यप, जो एक रोलर स्केटिंग कोच हैं, उसके एक रिप्रेजेंटेशन के कारण हुआ था, जिन्होंने यह नहीं बताया कि उनकी बेटी, कुदरत कश्यप, उसको इस बदलाव से सीधा फायदा होगा। कोर्ट के सामने रखी गई फाइलों से पता चला कि उनके रिप्रेजेंटेशन ने अधिकारियों को प्रभावित किया और आखिरकार इससे विचार क्षेत्र का दायरा बढ़ गया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ जानकारी न देना ही इस बदलाव रद्द करने के लिए काफी था, यह देखते हुए कि पॉलिसी में बदलाव की नींव ही खराब थी। मनमानी और दोहरा मापदंड बेंच ने साफ तौर पर दिख रही कमियों को भी उजागर किया। उसी 2024 सेशन के दौरान, कई अन्य मेडिकल और संबंधित कोर्स के लिए खेल उपलब्धियों का मूल्यांकन केवल क्लास XI और XII के आधार पर किया गया। यहां तक कि पोस्टग्रेजुएट मेडिकल और डेंटल कोर्स के लिए भी, प्रॉस्पेक्टस में MBBS और BDS के दौरान की उपलब्धियों तक ही विचार सीमित था। कोर्ट ने कहा कि स्पोर्ट्स पॉलिसी, 2023 में खेल उपलब्धियों के लिए किन एकेडमिक सालों पर विचार किया जाएगा, यह साफ तौर पर नहीं बताया गया। असल में इसमें सब-जूनियर टूर्नामेंट को बाहर रखा गया। फिर भी यूनिवर्सिटी के ईमेल में किसी भी क्लास या साल की उपलब्धियों की मांग की गई, जिससे मनमानी और पक्षपात की गुंजाइश बनी। पिछले फैसलों पर भरोसा करते हुए कोर्ट ने जोर दिया कि पॉलिसी के फैसले भी आर्टिकल 14 के तहत तर्कसंगतता की कसौटी पर खरे उतरने चाहिए। उसने कहा कि एडमिशन के नियमों को शुरू में ही "लचीला" और अपरिभाषित छोड़ने से मनमानी और भाई-भतीजावाद "चुपके से" घुस जाता है। बेंच ने कहा कि राज्य 2023 के COVID से संबंधित छूट का हवाला देकर 2024 के बदलाव को सही नहीं ठहरा सकता> एडमिशन के मानदंडों में कोई भी बदलाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले पूरी तरह से परिभाषित होना चाहिए। 2024 एडमिशन के लिए राहत दी गई पॉलिसी में बदलाव को गैर-कानूनी मानते हुए कोर्ट ने राहत सिर्फ़ अपने सामने मौजूद अपील करने वालों तक ही सीमित रखी ताकि पूरे हो चुके एडमिशन में कोई दिक्कत न हो। कोर्ट ने निर्देश दिया: 1. दिवजोत सेखों और शुभकर्मन सिंह को सरकारी मेडिकल कॉलेज की उन सीटों पर एडमिशन दिया जाए जो कुदरत कश्यप और मनसीरत कौर को अलॉट की गईx। 2. कुदरत कश्यप और मनसीरत कौर को प्राइवेट कॉलेज की उन सीटों पर शिफ्ट किया जाए जो पहले अपील करने वालों के पास थीं। 3. सभी उम्मीदवारों की पहले से की गई पढ़ाई और फीस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 2025 सेशन के एडमिशन पर कोर्ट ने पाया कि 2025 सेशन के लिए भी वही गलत पॉलिसी जारी रखी गई। हालांकि, क्योंकि एडमिशन पहले ही पूरे हो चुके थे और प्रभावित उम्मीदवार कोर्ट के सामने नहीं थे, इसलिए कोर्ट ने तुरंत राहत देने से मना कर दिया। 2025 सेशन के अपील करने वालों को सभी ज़रूरी पार्टियों को शामिल करके नए सिरे से हाई कोर्ट में जाने की आज़ादी दी गई। अपीलों को मंज़ूरी देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने MBBS और BDS एडमिशन के लिए स्पोर्ट्स कोटा पॉलिसी में बीच में किए गए बदलाव को रद्द कर दिया। इस बात पर ज़ोर दिया कि बहुत ज़्यादा डिमांड वाले कोर्स के एडमिशन प्रोसेस में पारदर्शिता, निरंतरता और मनमानी की गैर-मौजूदगी ज़रूरी है। कोर्ट ने पंजाब राज्य को भविष्य के सेशन के लिए बाहरी दबाव से प्रभावित हुए बिना पहले से ही एक तर्कसंगत और व्यापक पॉलिसी बनाने की छूट दी।

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