मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को विजय-स्टारर फिल्म 'जना नायकन' की रिलीज़ के लिए तुरंत फाइनल सेंसर क्लीयरेंस देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि फिल्म सेंसर बॉडी का अपने सेंसर सर्टिफिकेशन पर दोबारा विचार करने का फैसला गलत था।
जस्टिस पीटी आशा ने बुधवार को मामले पर फैसला सुरक्षित रखने के बाद आज सुबह फैसला सुनाया
फिल्ममेकर्स ने CBFC पर फाइनल सेंसर सर्टिफिकेट देने में देरी का आरोप लगाया था।
यह फिल्म विजय के फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म होगी, और इसे 9 जनवरी (आज) को रिलीज़ होना था। CBFC की एक जांच कमेटी ने शुरू में सिफारिश की थी कि फिल्म में कुछ कट करने के बाद उसे U/A 16 सर्टिफिकेट दिया जाए, जिसे फिल्ममेकर्स ने कर दिया था।
हालांकि, बाद में कुछ सीन में डिफेंस फोर्सेज को दिखाए जाने के तरीके और कुछ ऐसे सीन जो कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते थे, उनके बारे में शिकायत मिलने पर फिल्म को एक रिव्यू कमेटी के पास भेजा गया।
कोर्ट ने आज CBFC को तुरंत U/A 16 सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया है, क्योंकि फिल्ममेकर्स पहले ही सुझाए गए कट कर चुके हैं।
जब 6 जनवरी को पहली बार इस मामले की सुनवाई हुई, तो फिल्म के प्रोड्यूसर ने सवाल उठाया कि फिल्म के कंटेंट के बारे में शिकायत कैसे की जा सकती है, जबकि आम जनता के किसी भी सदस्य ने अभी तक फिल्म नहीं देखी थी।
हालांकि, अगली सुनवाई में यह पता चला कि शिकायत असल में जांच कमेटी के एक सदस्य ने की थी, जिसने दावा किया कि उसकी चिंताओं को रिकॉर्ड नहीं किया गया था।
फिल्म के प्रोडक्शन हाउस की तरफ से सीनियर एडवोकेट सतीश पारासरन ने सवाल उठाया कि फिल्ममेकर्स को इस बारे में अंधेरे में कैसे रखा जा सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि कानून के मुताबिक CBFC को ज़्यादा ट्रांसपेरेंट तरीके से काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म पर ₹500 करोड़ लगे हुए हैं, और CBFC पर प्रोड्यूसर की चिंताओं को हल्के में लेने का आरोप लगाया।
CBFC की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ARL सुंदरेशन ने जवाब दिया कि CBFC की तरफ से कोई गलत इरादा नहीं था और उसके चेयरमैन के पास इस मामले को रिवीजन कमेटी के पास भेजने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने आगे कहा कि जांच कमेटी की सिफारिशें इन अधिकारों को खत्म नहीं करती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि क्योंकि फाइनल सेंसर सर्टिफिकेट अभी तक नहीं दिया गया है, इसलिए चेयरमैन रिवीजन की कार्यवाही को मंज़ूरी दे सकते हैं।
कोर्ट ने आज इन तर्कों को खारिज कर दिया।

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