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हिंदू संगठनों के विरोध के बीच वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज पर एक्शन, मुस्लिम छात्रों को जाना पड़ेगा दूसरे कॉलेज Amid protests from Hindu organizations, action has been taken against Vaishno Devi Medical College, and Muslim students will have to transfer to other colleges.




कई हिंदू संगठनों के भारी विरोध और प्रदर्शन के बीच नेशनल मेडिकल कमीशन के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने जम्मू और कश्मीर के रियासी जिले में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया. मेडिकल कॉलेज को जरूरी न्यूनतम मानकों का पालन नहीं करने की वजह से दी गई अनुमति वापस ले ली है. 

MARB की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए काउंसलिंग के दौरान मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले सभी छात्रों को केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के सक्षम अथॉरिटी की ओर से जम्मू और कश्मीर के अन्य मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमेरी सीटों पर एडजस्ट किया जाएगा. बोर्ड के इस आदेश से दाखिला ले चुके छात्रों को बड़ी राहत मिली है.

मान्यता रद्द होने पर भी बहाल रहेगा एडमिशन

इसका मतलब यह कि दाखिला लेने वाले किसी भी छात्र को कॉलेज की मान्यता खत्म होने की वजह से MBBS सीट खोनी नहीं पड़ेगी. हालांकि उन्हें जम्मू और कश्मीर के मान्यता प्राप्त अन्य मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई करने जाना होगा. उन्हें कॉलेजों में उनकी नियमित स्वीकृत सीटों के साथ एडजस्ट किया जाएगा. इस रीलोकेशन को लागू करने की जिम्मेदारी केंद्र शासित प्रदेश के नामित स्वास्थ्य और काउंसलिंग अधिकारियों की रहेगी, जिन्हें आदेश की कॉपियों के साथ फैसले की औपचारिक रूप से भी जानकारी दे दी गई है.

रियासी स्थित मेडिकल कॉलेज की ओर से 5 दिसंबर, 2024 और 19 दिसंबर, 2024 को जारी NMC के नोटिस के तहत शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए 50 MBBS सीटों के साथ एक नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए आवेदन किया था. MARB की ओर से आवेदन पर कार्रवाई करते हुए पिछले साल 8 सितंबर को MBBS कोर्स शुरू करने के लिए अनुमति पत्र जारी कर दिया गया.

NMC के स्टैंडर्ड पर खरा नहीं उतरा

हालांकि अनुमति देते समय मेडिकल कॉलेज पर कई शर्तों भी लगाई गई थीं, साथ ही MARB ने गलत बयानी, गैर-अनुपालन या नियामक मानदंडों पर खरा नहीं उतरने की सूरत में अनुमति वापस लेने या रद्द करने का अधिकार सुरक्षित रखा था.

अनुमति पत्र जारी होने के बाद, NMC को कॉलेज में कई तरह की अपर्याप्त बुनियादी ढांचे, क्लिनिकल सामग्री और योग्य पूर्णकालिक टीचिंग फैकेल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों को लेकर कई शिकायतें मिलीं. शिकायत में मरीजों के लिए खराब व्यवस्था की ओर भी इशारा किया गया था.

नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट, 2019 की धारा 28(7) के तहत कार्रवाई करते हुए, जो MARB को बिना किसी पूर्व सूचना के मेडिकल संस्थानों का अचानक जांच करने का अधिकार देती है, जांचकर्ताओं की एक टीम ने 2 जनवरी को मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान उसे कई तरह की खामियां मिलीं. टीम ने अपनी रिपोर्ट कॉलेज में फैकल्टी की संख्या, क्लिनिकल मैटेरियल और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर कई तरह की खामियों को उजागर किया गया.

समिति को कहां-कहां मिली खामियां

तय मानकों के मुकाबले कॉलेज में टीचिंग फैकल्टी में 39 फीसदी तथा ट्यूटर, डेमोंस्ट्रेटर और सीनियर रेजिडेंट में 65 फीसदी की कमी दिखी. इसी तरह मरीजों की संख्या और क्लिनिकल सेवाएं भी मानदंडों से कहीं कमतर रहीं, दोपहर 1 बजे OPD में 182 मरीज थे, जबकि 400 होने चाहिए थे इसी तरह बेड ऑक्यूपेंसी भी महज 45 फीसदी ही रही थी, जबकि 80 फीसदी होनी चाहिए थी.

रिपोर्ट के अनुसार, इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भी औसतन 50 फीसदी बेड ही भरे थे, जबकि हर महीने करीब 25 डिलीवरी होती थीं, जिसे MARB ने “बहुत कम” माना. कुछ विभागों में तो छात्रों के प्रैक्टिकल लैब और रिसर्च लैब उपलब्ध नहीं थे. यहां तक लेक्चर थिएटर भी न्यूनतम मानकों से कहीं कम थे. लाइब्रेरी में 1,500 किताबों की जगह महज 744 किताबें ही थीं, इसी तरह जरूरी 15 अहम पत्रिकाओं के मुकाबले महज 2 पत्रिकाएं ही आती थीं.

हिंदू संगठन क्यों कर रहे विरोध

इस बीच श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल इंस्टीट्यूट के खिलाफ श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति लगातार धरना प्रदर्शन कर रही थी. समिति कल मंगलवार को जम्मू सचिवालय का घेराव करने पहुंची थी, जहां भारी पुलिस बल तैनात की गई थी. समिति की मांग थी कि इस कॉलेज को जल्द बंद किया जाए.

कॉलेज में मेडिकल सीटों के बंटवारे को लेकर कई महीनों से विवाद बना हुआ था. कॉलेज के कुल 50 एमबीबीएस सीटों में से 42 सीटें मुसलमान छात्रों को जबकि 7 सीटें हिंदू और एक सीट सिख छात्र को दिए जाने के बाद हिंदू संगठन लगातार विरोध कर रहे थे. उनका कहना था कि बैच में करीब 90% हिस्सा घाटी से है और यह गलत है.

यह विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुए जब जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशंस (JKBOPEE) ने मां वैष्णो देवी मेडिकल संस्थान के लिए 50 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की, जिनमें से 42 कश्मीर के और 8 जम्मू के थे. इनमें से कश्मीर के 36 और जम्मू के 3 छात्रों ने पहले ही दाखिला ले लिया.

कॉलेज को बंद करने की हो रही थी मांग

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा स्थापित मेडिकल कॉलेज में कश्मीर के मुस्लिम छात्रों के दाखिले पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इसे तुरंत बंद किया जाए. देश भर के हिंदू भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे का इस्तेमाल केवल हिंदू मंदिरों के विकास और उस समुदाय के सदस्यों के उत्थान के लिए किया जाना चाहिए. उनका कहना था कि हिंदू तीर्थयात्रियों के दान किए गए पैसे को मेडिकल कॉलेजों या अस्पतालों जैसे व्यावसायिक संस्थानों को चलाने पर खर्च नहीं किया जाना चाहिए, जहां छात्रों और मरीजों से “लाखों रुपये” लिए जाते हैं.

संघर्ष समिति, जो सनातन धर्म सभा, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल समेत करीब 60 संघ परिवार समर्थक संगठनों का एक समूह है, और इसका गठन कटरा के पास नए स्थापित SMVDIME में कश्मीरी मुस्लिम छात्रों के दाखिले के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए किया गया था.

मैं बच्चों का पिता होता तो वहां न भेजताः CM उमर

कॉलेज और मुस्लिम छात्रों के दाखिले को लेकर हुए उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “बच्चों ने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की और सीटें हासिल कीं. किसी ने उन पर कोई एहसान नहीं किया. अगर आप उन्हें वहां नहीं चाहते हैं तो उन्हें कहीं और एडजस्ट कर दीजिए.”

उन्होंने यह भी कहा, “इस हालात में, मुझे नहीं लगता कि बच्चे अब खुद वहां पढ़ना चाहेंगे. हम केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय से यह अनुरोध करते हैं कि इन छात्रों को दूसरे कॉलेजों में एडजस्ट कर दिया जाए. अगर मैं इन बच्चों का पेरेंट होता, तो मैं उन्हें वहां नहीं भेजता. हम नहीं चाहेंगे कि वे ऐसी जगह पढ़ें जहां इतनी ज्यादा राजनीति होती हो.”

दूसरे कॉलेजों में भेजे जाने की बात करते हुए सीएम ने कहा, “हमारे बच्चों को कोई दूसरा मेडिकल कॉलेज दें और उस मेडिकल कॉलेज (मां वैष्णो देवी) को बंद कर दें. हमें ऐसे मेडिकल कॉलेज की जरूरत नहीं है. इन बच्चों को अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडजस्ट करें.

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