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गलत निकले सब अंदाजे हमारे...की दिन अच्छे आए नहीं हमारे...All our predictions turned out to be wrong... that good days would never come for us...


दीप भांड

प्रसिद्ध शायर की ये चंद पंक्तियां सहज ही याद आ जाती है जब अपने प्रदेश,अपने इंदौर की हालत देखते है... "भागीरथ" में जो हुआ उससे भयंकर शायद ही कुछ हो पर इस बार ये अच्छा हुआ कि आपने जो फसल बोई थी वहीं आज आपको काटनी भी पड़ रही है और खानी भी पड़ रही है नहीं तो आप जरा देर नहीं लगाते अक्षेप लगाने में कि यह तो विपक्ष की चाल है, ये तो विपक्ष  प्रोपोगंडा बना रहा है।

इस बार सब कुछ कांच की तरह पारदर्शी है।आपका किया धरा पूरे भारत के सामने है...

यकीन मानिए रोज रोज आपके बारे में बुरा लिखने में अब हमको बुरा लगने लगा है बुरा लिखते हुए सहसा कलम रुक जाती है पर फिर याद आता है आप जब रोज अपने इंदौर के साथ बुरा कर रहे थे तो आपको बुरा कैसे नहीं लगता, किस मिट्टी के है आप...? 

भ्रष्टाचार प्रदेश पर इस कदर हावी है कि नियम,कानून जैसे पुड़िया बना कर नर्मदा जी में फेक दी हो...अधिकारी किसी के वश में नहीं है,ठेकेदार जैसा चाहे निर्माण कार्य कर सकता है  90 डिग्री के पुल,राऊ ब्रिज,मेट्रो स्टेशन बनने के बाद याद आता है पार्किंग तो बनाई ही नहीं और भी दर्जनों उदाहरण है और ये तभी संभव है जब कंट्रोलिंग बॉडीज या तो मूर्ख हो,अंधी हो या फिर बराबरी से अनैतिक आर्थिक लाभ ले रही हो आप तय करे आप किस श्रेणी में है...हा पर दोनों में से एक मे आप हैं ये तो तय है...

ये जनता बहुत उदार है आटे में नमक सहर्ष स्वीकार करती है पर जब नमक में आटा आ जाए तो हंसता खेलता शहर भागीरथ हों जाता है...कितना सुंदर और पवित्र नाम था भागीरथ आपने उसे अपवित्र कर दिया।

सोने की चिड़िया सा मेरा शहर आपने उसके पंख कुतर दिए...द्रुतगति से दौड़ता मेरा शहर अब दुर्गति से रेंग रहा है...संयोग देखिए कल मेरा मधुमिलन चौराहे से गुजरना हुआ जो अभी भी अधूरा है...और कल ही मैने मंगलयान पर बनी फिल्म देखी मुझे जिज्ञासा हुई कि जब एक चौराहे का बनाना इतना कठिन है तो मंगलयान तो कितनी कठियानियों से बनाया गया होगा कई वर्ष लगे होंगे इसके निर्माण में...फिर मैने मंगलयान निर्माण के बारे में जानना शुरू किया आपको हसी आएगी घूस्सा आएगा और दुख भी होगा यह जानकार कि मंगलयान अपनी स्वीकृति के 15 माह में पूरा होकर प्रक्षेपित (लॉन्च) किया गया...जो कि लगभग 78 करोड़ किमी की यात्रा कर लगभग 10 माह में मंगलग्रह पर जा पहुंचा...जितना समय इंसान को मंगल पर पहुंचने में लगा उससे ज्यादा समय मधूमिलन चौराहे को पूरा होने में लग रहा है।

इसका दोषी कौन है ये आप सभी जिम्मेदार तय करे पर हमारी नजर में इसका दोषी कोई एक नहीं ये आपका सब का "भागीरथ" प्रयास है और इसकी शुरुवात हुई मामाजी की विदाई से...शिवराज जी ने मप्र को एक बीमारू राज्य से जिसमें ना बिजली थी,ना सड़के,ना अस्पताल को एक विकासशील राज्य बनाने का अविश्वसनीय कार्य करा,इसके लिए हम सदैव आपके ऋणी रहेंगे किंतु निश्चित ही आपके कार्यकाल का एक नकारात्मक पहलू भी रहा उस पर अलग से चर्चा की जा सकती है...प्रदेश के विकास प्रगति के लिए आप सदैव याद किए जाएंगे...अब तो प्रदेश को जैसे किसी की नजर लग गई।

किंतु वास्तविकता यह भी थी कि आप हमेशा यहां नहीं रहने वाले थे आपकी कार्यशैली या उससे बेहतर कोई शैली आगे बढाई जानी थी पर "दुर्भाग्य" से यह हो ना सका।


कहते है जब रोम जल रहा था तब "नीरो" बांसुरी बजा रहा था...

जब महान साम्राज्य रोम धू धू कर जल रहा था,बर्बाद हो था,तब वहां का सम्राट "नीरो" अपने महल में अय्याशियों में डूबा,चिंतामुक्त अपने मनोरंजन में व्यस्त था ...पर याद रखिए उसी आग ने उसके महल को भी खाक कर दिया था..आज यही हुआ आपकी लगाई लापरवाही की आग में आपका किला भी ढह गया...


कंगना राणावत की एक प्रसिद्ध फिल्म का डायलॉग है..."अभी तो आपको और हमें और जलील होना है"...ये सच है अभी आपको और हमे(जनता) और जलील होना है...चुनाव जीतने के लिए आपने जो मुफ्त की रेवड़ियां लाडली बहनों को बांटी है उसका हिसाब अभी आपको और हमे दोनों को चुकाना है...ये रेवड़िया सत्ता और प्रजा दोनों को निगल जाएगी...हो सकता है फिर चुनाव हो फिर आप कुछ रेवड़िया बांट दे और जीत जाए पर ध्यान रहे आप रेवड़िया नहीं धीमा ज़हर बांट रहे है।

और इन सबका सबसे बड़ा दोषी है आपका संगठन जो आपकी इन सब मनमानियों को धृतराष्ट्र की तरह मौन रह कर देखता रहा... संगठन कर्तव्य था जब ये अनैतिक नीतियां बन रही थी लागू हो रही थी तब संगठन अपना विरोध जताता पर आप चुप रहे और अब जब पानी सर के ऊपर जा चुका है तब आप सक्रिय हुए है समय बताएगा आपके इस मौन की कीमत ये प्रदेश ये शहर किस तरह चुकाएगा...

 माँ अहिल्या से प्रार्थना है अपने प्रदेश अपने मालवा अपने इंदौर की रक्षा करना माँ अब आप ही का आसरा है...

✍️दीप भांड✍️

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