मुख्यमंत्री महापौर को इस्तीफा देना चाहिए ?
कैलाश के बिगड़े बोल क्या इतने बड़े मंत्री को क्या शोभा देता है ?
मौतों के सवाल पर मंत्री कैलाश की बदजुबानी कहा-गंदा !
अफसरों की बैठक के बाद सीएम लौटे। पत्रकारों ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से 13 मौतों पर सवाल पूछा। पत्रकार के सवाल पर उन्होंने गंदे शब्द कहे। शब्द इतने गंदे कि बौद्धिक प्रतिकार इसे लिखना भी मर्यादा के खिलाफ समझता है भागीरथपुरा दूषित पेयजल मामले में बुधवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित बैठक से निकलते समय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से एनडीटीवी के एक पत्रकार ने सवाल किया। पत्रकार ने पूछा कि पीड़ितों को रिफंड देने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक वह नहीं मिला है और न ही पीने के पानी की समुचित व्यवस्था हुई है। इस प्रश्न पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नाराज होते हुए कहा, “छोड़ो, तुम फोकट सवाल मत पूछो यार, क्या हुआ… इस पर पत्रकार ने कहा कि आप ठीक से बात कीजिए और अपशब्दों का प्रयोग न करें। आप इतने वरिष्ठ मंत्री हैं, ऐसे शब्द आपको शोभा नहीं देते। इस पर मंत्री ने कहा, “तुम यहां से निकलो।” पत्रकार ने जवाब दिया, मैं तो निकलूंगा ही…
कोहराम मचा है मौतें हो रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का सिस्टम शिविर लगाने के बाद भी लापरवाह बना हुआ है। बुधवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भागीरथपुरा में अमले ने तीन साल की बच्ची सृष्टि पाठक को एक्सपायरी दवा दे दी। यह दवा बुधवार को ही एक्सपायरी हो रही थी। फिर भी डॉक्टरों ने पांच दिनों के लिए यह दवा पीने के लिए दे दी। बच्ची के पिता ने दवा और पर्चा मंत्री विजयवर्गीय को दिखाया। मंत्री ने देखा, लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं कहा।
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से एक हैरान करने वाली और गंभीर खबर सामने आई है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोग डायरिया और डिहाइड्रेशन की शिकायत के बाद अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीमारों और मौतों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।
प्रशासन की शुरुआती जांच में सामने आया है कि मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में लीकेज था और उसके ठीक ऊपर शौचालय बना हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि इसी कारण सीवर का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे यह त्रासदी हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और सभी मरीजों का इलाज सरकार के खर्च पर कराने की घोषणा की है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इलाके के 2,703 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें करीब 12 हजार लोगों की जांच की गई। इनमें से 111 मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में घटित घटना के बाद अस्पताल पहुंचकर उपचाराधीन नागरिकों का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
इस दौरान मुख्यमंत्री यादव ने चिकित्सकों से उपचार की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी प्रभावित नागरिकों को समुचित, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।दूषित जल से अब तक 13 की मौत हो चुकी है। 150 से ज्यादा लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं इस बीच अब खुद मुख्यमंत्री मरीजों का हाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचे हुए हैं।
दो याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों के मामले में हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें से एक इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इंसानी द्वारा, जबकि दूसरी भागीरथपुरा निवासी राहुल गायकवाड़ द्वारा दायर की गई है। कोर्ट में बताया गया कि क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। कई मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। वहीं कांग्रेस ने मामले की जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति गठित की है। इसमें पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, जयवर्धन सिंह, बदनावर विधायक भंवर सिंह शेखावत, तराना विधायक महेश परमार और सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के वर्मा नर्सिंग होम पहुंचकर 12 मरीजों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और डॉक्टरों से उपचार की स्थिति पर चर्चा की। …

Post a Comment