प्रणव बजाज
हॉर्न ऑफ अफ्रीका का एक प्रमुख देश है इथियोपिया, जिसके भारत से करीब 2000 साल पुराने संबंध हैं। हॉर्न ऑफ अफ्रीका में इथियोपिया, इरीट्रिया, जिबूती और सोमालिया आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16-17 दिसंबर को इथियोपिया का दौरा करेंगे। यह इस साल अफ्रीका की उनकी तीसरी यात्रा होगी और इससे वैश्विक दक्षिण के नेता के रूप में भारत की भूमिका और मजबूत होगी। प्रधानमंत्री जॉर्डन का दौरा करने के बाद और ओमान की यात्रा से पहले इथियोपिया के लिए रवाना होंगे। इसी इथियोपिया में भारत रेल लाइन बिछाने से लेकर ट्रेन के इंजन, बोगियों को बनाने में मदद कर रहा है। इससे इथियोपिया में पहले से ही मौजूद चीन के कान खड़े हो गए हैं।
भारत की वजह से बढ़ा अफ्रीका का प्रतिनिधित्व
अफ्रीका और भारत के दीर्घकालिक संबंध साझा उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्ष से विकसित होकर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक आयामों पर व्यापक सहयोग में तब्दील हो गए हैं। भारत द्वारा अपनी अध्यक्षता के दौरान अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल करने का समर्थन वैश्विक समावेशिता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस कदम से न केवल प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अफ्रीका का प्रतिनिधित्व बढ़ा है, बल्कि अफ्रीका और भारत के बीच मजबूत और स्थायी संबंधों को भी बल मिला है। 2008 में अपनी स्थापना के बाद से पिछले कई भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलनों (आईएएफएस) ने दोनों देशों के बीच राजनीतिक और राजनयिक संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
इथियोपिया में ईसाई-मुस्लिम आबादी ज्यादा
इथियोपिया में ओरोमो (Oromo) और अम्हारा (Amhara) जातीय समूह सबसे ज्यादा आबादी वाले हैं, जो कुल जनसंख्या के 60% से ज्यादा हैं। ओरोमो सबसे बड़ा समूह है (लगभग 35-40%) और अम्हारा दूसरा सबसे बड़ा (लगभग 27%) है, जो देश के हाइलैंड्स में रहते हैं। धार्मिक रूप से, यह एक ईसाई बहुल देश है (लगभग 60-70% ईसाई, मुख्य रूप से इथियोपियन ऑर्थोडॉक्स), जिसके बाद इस्लाम (लगभग 30-34%) दूसरा सबसे बड़ा धर्म है।
भारत ने कर दी थी देरी, चीन ने लपक लिया
indbiz.gov.in समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने वित्तीय सहायता (ऋण), तकनीकी विशेषज्ञता (आरआईटीईईएस) और लोकोमोटिव उपलब्ध कराकर इथियोपिया के रेलवे विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, अदीस अबाबा-जिबूती रेलवे जैसी प्रमुख लाइनें अंततः भारतीय ऋण प्रक्रिया में देरी के बाद चीन की मदद से बन पाईं, जो इथियोपिया के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण लेकिन जटिल साझेदारी को दर्शाती है।
इथियोपियाई रेलवे में भारत की प्रमुख भूमिकाएं
भारत ने इथियोपिया के चीनी उद्योग और रेलवे क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण रियायती ऋण लाइनें (1 अरब डॉलर से अधिक) प्रदान कीं, जिनमें जिबूती जैसी महत्वपूर्ण लाइनों के लिए अध्ययन भी शामिल हैं। भारतीय रेलवे की आरआईटीईईएस (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विसेज) ने इथियोपिया में ट्रैक बिछाने और विद्युतीकरण के लिए व्यवहार्यता अध्ययन किए और रेलवे संचालन में अपनी विशेषज्ञता साझा की। मुख्य लाइन चीन को दी गई, जबकि भारत अफ्रीका को रेलवे पुर्जे और लोकोमोटिव इंजन(जैसे मारहोरा संयंत्र से निर्मित) निर्यात करता है, जिससे क्षेत्रीय रेल बुनियादी ढांचे को समर्थन मिलता है।
इथियोपिया का दूसरा बड़ा कारोबारी साझेदार भारत
भारत, इथियोपिया का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत के वाणिज्य विभाग के अनुसार, 2023-24 के दौरान इथियोपिया के साथ द्विपक्षीय व्यापार 571.52 मिलियन डॉलर रहा, जिसमें भारत का इथियोपिया को निर्यात 489.59 मिलियन डॉलर और आयात 81.93 मिलियन डॉलर रहा। अधिकारी ने बताया कि इस साझेदारी में तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से क्षमता निर्माण सहयोग, लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए अनुदान और इथियोपिया द्वारा निर्धारित प्राथमिकताओं पर आधारित परियोजनाओं के लिए रियायती ऋण शामिल हैं।
भारत ने रेलवे के लिए दी बड़ी मदद
द इकनॉमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, इथियोपिया अफ्रीका में भारत से दीर्घकालिक रियायती ऋण प्राप्त करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है। भारत ने ग्रामीण विद्युतीकरण, चीनी उद्योग और रेलवे जैसे क्षेत्रों के लिए इथियोपिया को 1 अरब डॉलर से अधिक की ऋण राशि स्वीकृत की है।स्वतंत्रता प्राप्त करने के तुरंत बाद, सरदार संत सिंह के नेतृत्व में एक सद्भावना मिशन इथियोपिया भेजा गया। 1948 में दूतावास स्तर पर राजनयिक संबंध स्थापित हुए। 1950 में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हुए, जिसमें सरदार संत सिंह पहले राजदूत थे।
भारत मंगाता है कीमती पत्थर
भारत से निर्यात में मुख्य रूप से प्राथमिक और अर्ध-निर्मित लौह एवं इस्पात उत्पाद, दवाएं और फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी और उपकरण, धातु निर्मित वस्तुएं वगैरह शामिल हैं। इथियोपिया से भारत के प्रमुख आयात में दालें, बहुमूल्य और अर्ध-बहुमूल्य पत्थर, सब्जियां और बीज, चमड़ा और मसाले शामिल हैं।अदीस अबाबा-जिबूती रेलवे लाइन
अदीस अबाबा-जिबूती रेलवे लाइन के लिए भारत ने पैसे देने की पेशकश की थी, लेकिन भारतीय ऋण स्वीकृति में देरी के कारण यह परियोजना चीन को मिल गई, जो प्रतिस्पर्धा और विकसित होती साझेदारियों को दर्शाती है। भारत बिजली, कृषि और ड्राई पोर्ट सहित अन्य इथियोपियाई अवसंरचनाओं का भी समर्थन करता है, जिससे वह एक प्रमुख आर्थिक भागीदार के रूप में स्थापित होता है।

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