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रक्षा खरीदारी के नियम बदलेंगे, स्वदेशीकरण पर जोर, डिफेंस पैनल के क्या हैं सुझावDefense procurement rules will change, with an emphasis on indigenization; what are the suggestions of the defense panel?

 केंद्र सरकार रक्षा सामग्रियों की खरीदारी के नियमों में बड़े बदलावों पर विचार कर रही है। इस बदलाव का लक्ष्य ये है कि देश में ही बने रक्षा सामानों को ही बढ़ावा मिले और साथ ही साथ रक्षा जरूरतों के लिए खरीद प्रक्रिया भी तेज रहे। भरोसेमंद सूत्रों से पता चला है कि अब सरकार इस क्षेत्र में 'स्वदेशी सामग्री' की शर्त शुरू में ही लागू करने की जगह, इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की सोच रही है। मतलब, अब कंपनियों को एक निश्चित वक्त मिलेगा, ताकि वे धीरे-धीरे स्वदेशी को पूरी तरह से अपना सकें। यही नहीं 100 करोड़ रुपये तक के सौदे के लिए सिंगल-वेंडर मेकेनिज्म और आवेदकों को फिल्टर करने के लिए स्पष्ट फ्रेमवर्क तैयार करने पर भी विचार हो रहा है। इससे खरीदारी की प्रक्रिया तेज हो सकेगी


रक्षा खरीदारी पर सुझाव के लिए पैनल

ET की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने इसी साल जून में पूर्व ब्योरक्रेट अपूर्व चंद्र की सलाह पर डायरेक्टर जनरल (एक्विजिशन) की अगुवाई में डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 (DAP 2020) की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल पैनल बनाया था। इस पैनल को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह सशस्त्र सेनाओं की मौजूदा जरूरतों के हिसाब से खरीदारी प्रक्रिया तेज करने को लेकर ऐसे सुझाव दें, जो आत्मनिर्भरत भारत और मेक इन इंडिया के लक्ष्यों पर भी खरे उतर सकें।

स्वदेशी सामग्री से जुड़ी शर्तों में सहजता

इस पैनल ने कई दौर की बातचीत के बाद अपनी सिफारिशों का पहला ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इसके अनुसार जो सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश तैयार की गई है, उसमें डीएपी 2020 के तहत रक्षा खरीद की पांच श्रेणियों में से स्वदेशी सामग्री (IC) की शर्त पर विस्तार से विचार हुआ है। क्योंकि, डीएपी 2020 की व्यवस्था के तहत स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी के लिए जो श्रेणियां बटी थीं, उसे अब ज्यादा सहज बनाए जाने पर जोर दिया जा रहा है। क्योंकि, सरकार भी शुरुआत में ही स्वदेशी सामग्री की शर्त को बदलकर इसे फेजवाइज करने की सोच रही है। इससे कंपनियों को थोड़ा समय मिलेगा और वह स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ा सकेंगी। इससे ऐसी शर्त कंपनियों के लिए बाधा नहीं बन सकेंगे।

स्वदेशीकरण के लिए रिसर्च, इनोवेशन

इसके अलावा जो बड़ा बदलाव नजर आने वाला है, उसके तहत विशेष रूप से घरेलू स्तर पर भारतीय इनोवेशन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को प्रोत्साहन दिया जाना है। हालांकि, प्रस्ताव के तहत इस क्षेत्र के लिए 100 करोड़ मूल्य से ज्यादा की सामग्री नहीं रखी गई है। इसके तहत ज्यादातर काम पायलट प्रोजेक्ट के तहत होंगे, ताकि प्रक्रियात्मक देरी नहीं हो और सशस्त्र सेनाओं की तत्काल वाली जरूरतों को तुरंत पूरा किया जा सके। मसलन, एक वेंडर की ओर से सप्लाई किए गए नाइट विजन गॉगल्स, छोटे ड्रोन आदि सामान यदि सभी तरह के फील्ड टेस्टिंग में सही पाए गए, तो फिर इनकी खरीदारी के लिए बड़े ऑर्डर भी जारी किए जा सकते हैं। कुल मिलाकर फोकस यह है कि सशस्त्र सेनाओं की आवश्यकताओं को तेजी से पूरा भी किया जा सके और साथ के साथ स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की प्रक्रिया भी जारी रहे।घरेलू सामग्रियों के विकास पर इंसेंटिव भी!

जानकारी यह भी है कि पैनल ने यह भी सुझाव दिए हैं कि अगर किसी बड़े उपकरण का कोई पार्ट भारत में विकसित हुआ है, लेकिन वह नई खरीदारी के तहत वापस आयात के माध्यम से आता है तो उसे भी स्वदेशी सामग्री माना जाना चाहिए और उसे भी दी जाने वाली प्राथमिकता में शामिल किया जाना चाहिए। पता यह भी चला है कि पैनल ने यह सुझाव भी दिए हैं कि सेमीकंडक्टर, नए मैटेरियल और नई टेक्नोलॉजी में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और क्षमताओं के विकास को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव भी लाए जाएं।

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