संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में उम्मीदवारों की सिर्फ शैक्षणिक योग्यता और ज्ञान ही नहीं, बल्कि जनसेवा के प्रति उनकी सोच को भी महत्व दिया जाना चाहिए। आयोग के चेयरपर्सन ने कहा कि हर योग्य और प्रतिभाशाली व्यक्ति जरूरी नहीं कि सार्वजनिक सेवा में आने की इच्छा रखता हो। ऐसे में चयन प्रक्रिया का उद्देश्य उन उम्मीदवारों की पहचान करना होना चाहिए, जो प्रशासनिक जिम्मेदारी को जनहित और सेवा की भावना के साथ निभाने के लिए तैयार हों।
सिविल सेवा परीक्षा के अंतिम चरण यानी इंटरव्यू में उम्मीदवार के व्यक्तित्व, निर्णय लेने की क्षमता, परिस्थितियों को समझने के तरीके और प्रशासनिक दृष्टिकोण का आकलन किया जाता है। इसी कड़ी में जनसेवा की भावना को भी महत्वपूर्ण पहलू माना जा सकता है।
चेयरपर्सन के मुताबिक, प्रशासनिक पद केवल प्रतिष्ठा या करियर का माध्यम नहीं हैं। इन पदों पर काम करने वाले अधिकारियों के फैसलों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। इसलिए चयन के दौरान यह समझना जरूरी है कि उम्मीदवार सार्वजनिक जिम्मेदारियों और लोगों की समस्याओं के प्रति कितना संवेदनशील है।
हालांकि जनसेवा की भावना को मापना आसान नहीं है। इंटरव्यू बोर्ड को उम्मीदवार के जवाबों के साथ उसके तर्क, व्यवहार और परिस्थितिजन्य प्रश्नों पर प्रतिक्रिया को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
UPSC सिविल सेवा चयन में यह दृष्टिकोण प्रशासनिक क्षमता और सार्वजनिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

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