नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना के दौरान अखंड ज्योत जलाने की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु इसे पूरे नौ दिनों तक लगातार प्रज्वलित रखने का संकल्प लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं में अखंड ज्योत को श्रद्धा, सकारात्मक ऊर्जा और देवी आराधना का प्रतीक माना जाता है। हालांकि इसे जलाने से पहले पूजा-पद्धति और घर की परंपरा के अनुसार कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।
अखंड ज्योत के लिए साफ और सुरक्षित स्थान चुनना चाहिए। दीपक को देवी की प्रतिमा या कलश के पास रखा जाता है, लेकिन पर्दे, कागज, कपड़े और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से पर्याप्त दूरी रखना जरूरी है। दीपक को ऐसी जगह रखें जहां हवा का तेज झोंका सीधे न लगे और उसके गिरने की आशंका भी न हो।
परंपरा के अनुसार अखंड ज्योत में घी या तेल का इस्तेमाल किया जाता है। किसका प्रयोग करना है, यह परिवार की पूजा-पद्धति और स्थानीय मान्यता पर निर्भर करता है। बाती पर्याप्त लंबी रखें और समय-समय पर ईंधन की मात्रा देखते रहें, ताकि ज्योत बुझने न पाए।
पूजा के दौरान दीपक को अकेला छोड़ना उचित नहीं माना जाता। घर से बाहर जाते समय इसकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। यदि ज्योत बुझ जाए तो उसे लेकर अलग-अलग परंपराओं में अलग मान्यताएं हैं, इसलिए अपने परिवार के पुरोहित या पूजा-पद्धति के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाना बेहतर है।
सबसे जरूरी बात यह है कि धार्मिक आस्था के साथ अग्नि सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें। बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दीपक दूर रखें।

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