मुरैना। विदेशों से आयात किए गए पुराने टायरों को कथित तौर पर जलाकर निपटाने से निकल रहे जहरीले धुएं का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। मुरैना में टायरों के जलने से फैल रहे प्रदूषण और उससे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित गंभीर असर को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने संबंधित कंपनी से जवाब मांगा है। मामले में कैंसर समेत गंभीर बीमारियों के संभावित खतरे को लेकर भी चिंता जताई गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुराने और अनुपयोगी टायरों के निपटारे की प्रक्रिया में पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। टायर जलाने से निकलने वाले धुएं में जहरीले रसायन और सूक्ष्म कण वातावरण में फैल सकते हैं। इसका असर आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने की आशंका जताई गई है। खास तौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी परेशानी झेल रहे लोगों के लिए प्रदूषित हवा चिंता का विषय बन सकती है।
मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विदेशों से आने वाले पुराने टायरों के निपटारे की अनुमति किस आधार पर दी गई और उनकी प्रोसेसिंग की निगरानी किसने की? कंपनी को पर्यावरणीय नियमों के पालन और टायरों के निपटारे की प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा।
अदालत की कार्रवाई ने मुरैना में प्रदूषण नियंत्रण और औद्योगिक गतिविधियों की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब हाईकोर्ट में कंपनी के जवाब के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि टायरों के निपटारे में नियमों का पालन हुआ या नहीं और स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य व पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभागों ने क्या कदम उठाए।

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