श्योपुर। हर घर नल से पानी पहुंचाने के सरकारी दावे की जमीनी हकीकत श्योपुर के ग्रामीण इलाकों में अलग तस्वीर दिखा रही है। नल-जल योजना के बावजूद ग्रामीणों को आज भी दूर-दराज के जलस्रोतों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। गर्मी और पेयजल संकट के बीच महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई जगह पाइपलाइन बिछाने और नल कनेक्शन देने के बाद भी नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
ग्रामीणों का कहना है कि योजना पर सरकारी धन खर्च होने के बावजूद घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा। कहीं मोटर और बिजली की समस्या है तो कहीं पाइपलाइन और टंकियां होने के बावजूद पानी की सप्लाई नियमित नहीं है। ऐसे में कागजों पर पूरा दिखने वाला काम गांवों में लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रहा।
सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। जब सरकार हर घर नल से जल पहुंचाने का दावा करती है, तो फिर ग्रामीणों को पानी के लिए मीलों दूर क्यों जाना पड़ रहा है? योजना के तहत खर्च हुई राशि, काम की गुणवत्ता और वास्तविक जलापूर्ति की निगरानी किस स्तर पर हुई?
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। सरकारी वादे अपनी जगह हैं, लेकिन गांवों में पानी की हकीकत कुछ और है। अब ग्रामीणों की मांग है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर योजना की वास्तविक स्थिति जांचें और जहां नल सूखे हैं, वहां नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करें।

Post a Comment