Top News
Loading...

भागीरथपुरा रिपोर्ट पर संग्राम: उमंग सिंघार का आरोप—‘रिपोर्ट मैनिपुलेट हुई, रिटायर्ड जस्टिस पर दबाव डालकर महापौर और पार्षदों को बचाया’



इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद सियासी टकराव तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को इंदौर में रिपोर्ट को ही कठघरे में खड़ा करते हुए सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। सिंघार ने दावा किया कि रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता पर दबाव डालकर रिपोर्ट की दिशा प्रभावित की गई और महापौर पुष्यमित्र भार्गव तथा पार्षदों को बचाने की कोशिश हुई।


सिंघार ने कहा कि जब एक तरफ रिपोर्ट में वर्षों की व्यवस्थागत लापरवाही, पाइपलाइन और सीवर व्यवस्था की खामियां तथा टेंडर प्रक्रिया में भारी देरी सामने आ रही है, तो फिर राजनीतिक जवाबदेही से जुड़े सवालों को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में पाइपलाइन बदलने की प्रक्रिया में कुल 859 दिन तक की देरी का उल्लेख है। रिपोर्ट में महापौर के स्तर पर फाइल साइन होने में 66 दिन की देरी का भी उल्लेख है, हालांकि आयोग ने इसे महापौर की व्यक्तिगत लापरवाही का प्रमाण नहीं माना है।


यहीं से सिंघार ने सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि “रिटायर्ड जस्टिस पर दबाव बनाया गया कि सिर्फ दो अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करो, महापौर, पार्षद और मंत्री को बचाओ।” उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि यदि न्यायिक जांच जैसी प्रक्रिया पर भी राजनीतिक दबाव का आरोप लगेगा तो जवाबदेही की व्यवस्था पर जनता भरोसा कैसे करेगी।


रिपोर्ट में कई स्तरों पर प्रशासनिक चूक दर्ज होने के बावजूद महापौर और कुछ तत्कालीन अधिकारियों को व्यक्तिगत जिम्मेदारी से राहत मिली है। दूसरी ओर, रिपोर्ट ने लंबे समय तक चली प्रक्रियागत देरी और निगरानी की कमियों को गंभीरता से रेखांकित किया है।


सिंघार ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजा बढ़ाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया, उन्हें केवल राहत राशि देकर सरकार अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती।


अब असली सवाल यही है—क्या भागीरथपुरा की त्रासदी की जवाबदेही सिर्फ फाइलों और अधिकारियों तक सीमित रहेगी, या राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णयों की भी स्वतंत्र जांच होगी? सिंघार के आरोपों ने सार्वजनिक हो चुकी न्यायिक रिपोर्ट के बाद विवाद को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।

Post a Comment

Previous Post Next Post