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UCC पर तीन सहयोगियों ने बढ़ाई BJP की टेंशन, अमित शाह के ऐलान के बाद NDA में सावधानी के सुर



नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के दावे के बाद अब सियासी बहस NDA के भीतर भी तेज होती दिखाई दे रही है। बीजेपी के लिए चुनौती सिर्फ विपक्ष की आपत्तियां नहीं, बल्कि उसके कुछ सहयोगी दलों के अलग-अलग रुख भी हैं। UCC जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सहयोगियों की सावधानी ने गठबंधन की एकजुटता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।


अमित शाह ने UCC को लेकर बीजेपी के एजेंडे को स्पष्ट करते हुए NDA शासित राज्यों में इसे लागू करने की बात कही है। इसके बाद गठबंधन के भीतर शामिल कुछ दलों ने इस मुद्दे पर तत्काल समर्थन देने के बजाय अपने राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखने के संकेत दिए हैं।


खास तौर पर बिहार की राजनीति में JDU का रुख अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी पहले भी कई राष्ट्रीय मुद्दों पर बीजेपी से अलग राय रखती रही है। ऐसे में UCC पर उसका अंतिम रुख गठबंधन की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी तरह अन्य सहयोगी दल भी अपने-अपने राज्यों की सामाजिक संरचना और मतदाता समीकरणों को देखते हुए सावधानी बरत रहे हैं।


बीजेपी के लिए चुनौती यह है कि UCC को लेकर पार्टी की स्पष्ट नीति और NDA के भीतर सहयोगियों की अलग प्राथमिकताओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा केवल कानून और विचारधारा का नहीं, बल्कि गठबंधन प्रबंधन और वोट बैंक की राजनीति का भी बड़ा सवाल बन सकता है।


अब नजर इस बात पर है कि NDA के सहयोगी आगे चलकर UCC पर बीजेपी के साथ खड़े होते हैं या अपनी अलग राजनीतिक लाइन कायम रखते हैं।

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