नई दिल्ली । बौद्धिक प्रतिकार
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रक्रिया के दौरान करीब 47.5 लाख नाम हटाए गए, जबकि नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए 15 दिनों में करीब 62 हजार आवेदन प्राप्त हुए।
आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों की ओर से नाम जुड़ने और हटने की प्रक्रिया पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। निर्वाचन अधिकारियों के सामने अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में बने रहें और अपात्र या मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाएं।
नए मतदाता बनने के लिए आए 62 हजार आवेदनों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इनमें कितने आवेदन पात्र पाए जाते हैं और कितने नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल होते हैं। इसी तरह हटाए गए 47.5 लाख नामों में मृत्यु, स्थानांतरण, डुप्लीकेट प्रविष्टि या अन्य कारणों का अनुपात भी महत्वपूर्ण होगा।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और अधिक सटीक बनाना है। ऐसे में अब निगाह हटाए गए नामों के कारणों और नए आवेदनों के सत्यापन पर रहेगी। सवाल यह भी है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हुए हैं, उनके लिए दावा-आपत्ति और पुनः नाम जुड़वाने की प्रक्रिया कितनी आसान और प्रभावी रहती है।

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