भोपाल । बौद्धिक प्रतिकार
मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत होने वाले संभावित फर्जीवाड़े और संदिग्ध क्लेम पर निगरानी मजबूत करने की तैयारी की गई है। राज्य सरकार ने स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट में 20 बंधपत्र चिकित्सकों की पदस्थापना की है। इन चिकित्सकों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल अस्पतालों से जुड़े उपचार और दस्तावेजों की चिकित्सकीय-तकनीकी जांच में किया जाएगा।
अब जांच केवल कागजी रिकॉर्ड और दावों के मिलान तक सीमित नहीं रहेगी। तैनात डॉक्टर यह देखने में मदद करेंगे कि मरीज के रिकॉर्ड में दर्ज बीमारी, जांच, उपचार, भर्ती अवधि और उपलब्ध मेडिकल दस्तावेज आपस में मेल खाते हैं या नहीं। संदिग्ध मामलों में उपचार की वास्तविक जरूरत और किए गए दावे के बीच अंतर की भी जांच की जा सकेगी।
आयुष्मान योजना में अस्पतालों द्वारा किए जाने वाले क्लेम की जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गलत उपचार विवरण, फर्जी दस्तावेज, अनावश्यक भर्ती अथवा ऐसे उपचार के दावे जिनका रिकॉर्ड से पर्याप्त आधार नहीं मिलता—इन मामलों में सरकारी राशि के गलत इस्तेमाल का खतरा रहता है।
20 डॉक्टरों की तैनाती के बाद स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि संदिग्ध मामलों की जांच समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारी तय हो।
अब सवाल यह है कि नई व्यवस्था के बाद कितने संदिग्ध क्लेम पकड़े जाते हैं और जांच में सामने आने वाली अनियमितताओं पर अस्पतालों और संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है।

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